Dhammapada Ani Mulya Vichar

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नावः प्रा.डॉ. ईश्वर तुकारामजी नंदपुरे
जन्मस्थळः 1.9.1948, भंडारा जिल्ह्यातील आकोट (विदर्भ)
शिक्षणः एम.ए.(मराठी वाङ्मय, आंबेडकर विचारधारा, गांधी विचार धारा) एम.कॉम्‌‍., एम. एड्., एम.एस.डब्ल्यू., एच.डी.एड्.,
बी.एड्., एच.एम.डी.एस्‌‍, पंडित (हिंदी वाङ्मय),
पी.एच.डी. (मराठी वाङ्य);
पीएच्‌‍.डी. (शिक्षणशास्त्र), पत्रकारिता.
व्यवसायः निवृत्त व्याख्याता (मराठी) एस.के. पोरवाल महाविद्यालय, कामठी (नागपूर)
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“धम्मपदाचा अभ्यासू सर्वधर्म समभाव राखू शकतो. तो संकुचित वृत्तीचा होऊ शकणार नाही. संबंध धम्मपदात असे एकही वाक्य आढळले नाही की, जे मला हिंदू या नात्याने मानवणार नाही.”
“आज आपण गौरवपूर्वक म्हणू शकतो, की भारताची जगाला जर कोणती सर्वोत्तम देणगी असेल, तर ती आहे भगवान बुद्ध. ते येथल्या समाजाचे सर्वोत्तम प्रतिनिधी होते. भारताचा इतिहास जो जाणतो, त्याला माहित आहे की, विचारसंघर्ष भरपूर झाला असला तरी बौद्ध धर्माचा जो सर्वोत्तम अंश होता, तो आम्ही पूर्ण मान्य केला.‌’ (धम्मपदंनवसंहिता)

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Weight 0.300 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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सत श्री अकाल, दास अजीत सिंह भल्ला सिख धर्म के सिद्धांतों और गुरुबाणी के प्रति गहरा विश्वास रखते हैं। आपने सिख इतिहास, गुरुओं के जीवन तथा गुरमत विचारधारा का गहन अध्ययन किया है।
इस पुस्तक के माध्यम से लेखक का उद्देश्य युवा पीढ़ी तथा जिज्ञासु पाठकों तक सिख गुरुओं की शिक्षाओं को सरल और सहज भाषा में पहुँचाना है, ताकि वे गुरु परंपरा के आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश को समझ सकें।
लेखक ने इससे पूर्व गुरु अमरदास जी (तीसरे नानक जी) के जीवन पर आधारित पुस्तक लिखी है। इसके अतिरिक्त सिख गुरु और मराठा संतों की सामाजिक भूमिका पर आधारित पुस्तक “दो धाराएँ एक प्रकाश” भी लिखी है।
लेखन और अध्यापन के साथ-साथ लेखक धर्म-प्रचार तथा समाज जागरण के कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।
वाहेगुरु जी का खालसा।
वाहेगुरु जी की फतेह ।।