Additional information
| Weight | 300 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 300 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
Gurucharitra is a devine treatise read in India, there are some hard ritualistic practices whichare to be folloved by the reader, hence many people dont read it. Women are prohibeted for its reading. Yet all of us have curiosity to know about Gurucharitra Shri. Bal Panchbhai has canverted the secred into a book so that one can read and follow the advice in it, It is a translation of the original quazi-poetic treatise in simple prose, which can be read by anyone at anyplace and anytime. The meaning of the secret and sacred original text is made avialable by this book to all.
अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।
अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।
नन्दकिशोर रघुनाथ पत्तरकिने ७ सप्टेंबर १९४५ एम. ए. (इंग्रजी साहित्य, संस्कृत, भाषाविज्ञान) साहित्यरत्न (हिन्दी) शास्त्री (संस्कृत) इंग्रजी अध्यापन पदविका, उच्च जर्मन पदविका, फ्रेन्च व तेलगु प्रमाणपत्र ◆ संस्थाकार्य – कार्यवाह, संस्कृत-भाषा-प्रचारिणी सभा, नागपूर. कार्यकारी संपादक. संस्कृत भवितव्यम् सदस्य, संस्कृत अध्ययन मंडल अमरावती विद्यापीठ • सहयोगी अध्यापक पदव्युत्तर भाषाविज्ञान विभाग, नागपूर विद्यापीठ अभ्यागत अध्यापक क्रियात्मिका आंग्ली […]
There is a focus on the requirements of the fine art students and the small advertisers in this book. Most of the people are unaware about the science of advertisement and therefore cannot gain full return through advertisement. In fact a product can be successfully advertised through the smallest advertisement with proper knowledge of it. Those who wish to work in the field of advertisement but have not takes formal education will be benefited by reading this book and others would be enlightened.
This is one act play of Dr. Vadyalkar based on social sequence, the dialogues is which are very interesting.
विषयांतर, हे पुस्तक म्हणजे नागपूरच्या दैनिक तरुण भारत मध्ये ३०-३२ वर्षांपूर्वी दीर्घकाळ प्रकाशित झालेल्या विषयांतर, या सदरातील प्रा. सुरेश खेडकर यांच्या २७ लेखांचा संग्रह. मूळ जुन्या लेखातील विचार अधिक स्पष्ट करण्यासाठी प्रत्येक लेखाच्या शेवटी त्यांनी, त्यातील विषयांशी सुसंगत ताजा कलम नव्याने लिहून जोडला आहे. यातील बहुसंख्य लेखात त्यांनी आपले अनुभव हलक्या फुलक्या विनोदी शैलीत मांडलेले आहेत. प्रा. सुरेश खेडकर एक उत्तम विडंबन कवी सुद्धा आहेत. १९८३ साली प्रकाशित झालेल्या त्यांच्या एप्रिल फुले या विडंबन काव्य संग्रहात पद्य स्वरूपात व्यक्त झालेली त्यांची शैली, गद्य स्वरूपात विषयांतर मध्ये दिसून येते.
आहे. विषयांतर सोबतच त्यांचे आणखी एक पुस्तक हास्यबोधही प्रकाशित होत
ते मुळात विद्युत अभियांत्रिकी (Electrical Engineering) चे प्राध्यापक असले तरी त्यांचे मराठी साहित्यातील योगदान प्रशंसनीय आहे. प्रा. सुरेश खेडकर यांच्याजवळ अनुभवांचा आणखी पुष्कळ साठा आहे व तो सुद्धा त्यांच्या आगामी पुस्तकांच्या रूपात लवकरात लवकर यावा, अशी शुभेच्छा मी व्यक्त करतो.
st
Select at least 2 products
to compare