Additional information
| Weight | 0.300 kg |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 16 × 3 cm |
| Weight | 0.300 kg |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 16 × 3 cm |
पलà¥à¤²à¤µà¥€ लघाटे का जनà¥à¤® गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° (मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶) में हà¥à¤† तथा वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में वे कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) में निवासरत हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥‚गोल विषय में à¤à¤®.à¤. à¤à¤µà¤‚ à¤à¤®. फिल. की उपाधि पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ की है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में वे à¤à¤• कंटेंट राइटर के रूप में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ हैं।
शिकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤µà¤‚ लेखन के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° से उनका जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ लंबे समय से रहा है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के बबीना सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ सेंटà¥à¤°à¤² सà¥à¤•ूल में पी. जी. शिकà¥à¤·à¤• के रूप में कारà¥à¤¯ किया है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) के गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤² विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में शिकà¥à¤·à¤¿à¤•ा के रूप में तथा à¤à¤• कोचिंग संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के à¤à¤¡à¤®à¤¿à¤¨ विà¤à¤¾à¤— में à¤à¥€ कारà¥à¤¯ किया है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में वे लेखन à¤à¤µà¤‚ कंटेंट निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ हैं तथा kuchnaya.com के फेसबà¥à¤• पेज के लिठबà¥à¤²à¥‰à¤— लेखन का कारà¥à¤¯ à¤à¥€ कर चà¥à¤•ी हैं।
लेखन के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उनका रà¥à¤à¤¾à¤¨ बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की गहराईयों तथा समाज और पà¥à¤°à¤•ृति से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ विविध पहलà¥à¤“ं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और à¤à¤¾à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ ढंग से अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन और जीवन-दरà¥à¤¶à¤¨ का सà¥à¤‚दर समनà¥à¤µà¤¯ दिखाई देता है।
साहितà¥à¤¯ के साथ-साथ संगीत में à¤à¥€ उनकी विशेष रà¥à¤šà¤¿ है। वे सà¥à¤—म संगीत में विशारद की शिकà¥à¤·à¤¾ पूरà¥à¤£à¤¤à¤¾ की ओर अगà¥à¤°à¤¸à¤° हैं तथा गायन परीकà¥à¤·à¤¾à¤“ं में विशेष योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर चà¥à¤•ी हैं।
उनकी रचनाà¤à¤ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताà¤à¤ ‘बालमन की उड़ान’ कावà¥à¤¯-संगà¥à¤°à¤¹ तथा मराठी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• ‘फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¾’ में पà¥à¤°à¤•ाशित हो चà¥à¤•ी हैं। इसके अतिरिकà¥à¤¤ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ ऑनलाइन साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• मंचों पर लेखन हेतॠउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अनेक पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£-पतà¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ हैं। साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• योगदान के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चेतना मंच फेसबà¥à¤• पेज दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ टà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ से à¤à¥€ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है।
‘मनाकà¥à¤·à¤°’ उनकी पà¥à¤°à¤¥à¤® सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° कावà¥à¤¯-कृति है। इस संगà¥à¤°à¤¹ में जीवन, पà¥à¤°à¥‡à¤®, रिशà¥à¤¤à¥‡, संघरà¥à¤·, आशा, पà¥à¤°à¤•ृति और मानवीय à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं के विविध रंगों को शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया गया है। उनका विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है कि शबà¥à¤¦ केवल अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का माधà¥à¤¯à¤® नहीं, बलà¥à¤•ि मन से मन तक पहà¥à¤à¤šà¤¨à¥‡ वाला à¤à¤• सशकà¥à¤¤ सेतॠहैं।
The tourism of worth seeing places has been published by Nachiket Publications. This book is one of the series and is about the Shegaon and the Saint Gajanan Maharaj. The readers of all ages are assisted through this book as ample information with photographs has been provided. Before visiting Shegaon are must read it.
डॉ. विदà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤° देवदास बनà¥à¤¸à¥‹à¤¡ यांचे कथा कावà¥à¤¯ नाटक ‘यशोधरा’ कथेतून हळूहळू à¤à¤• वेगळी, खोल आणि असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ करणारी वाट उघडत जाते. हे नाटक इतिहासाला सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤šà¥à¤¯à¤¾ नजरेतून नवà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥‡ बघायला à¤à¤¾à¤— पाडते. या नाटà¥à¤¯à¤¾à¤¤ यशोधरा केवळ तà¥à¤¯à¤¾à¤—ाची, मौनाची किंवा सहनशीलतेची सावली मà¥à¤¹à¤£à¥‚न उà¤à¥€ राहात नाही, तर ती विचार करते. पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ विचारते.
डॉ. विदà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤° बनà¥à¤¸à¥‹à¤¡
हे नाटक वाचताना सतत जाणवत राहते की तà¥à¤¯à¤¾à¤‚ची शैली काहीतरी वेगळे सà¥à¤šà¤µà¤¤à¥‡. कथेकरीचà¥à¤¯à¤¾ माधà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¤à¥‚न उलगडत जाणारे हे नाटà¥à¤¯ शबà¥à¤¦à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ पलीकडे जाऊन वाचकाचà¥à¤¯à¤¾ मनाला आणि मेंदूला अंतरà¥à¤®à¥à¤– करते. यशोधरा हे पारंपरिक अरà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‡ à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• नाटक नाही; तसेच ते केवळ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤µà¤¾à¤¦à¥€ घोषणा करणारे लेखनही नाही.
कथाकावà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ या अनोखà¥à¤¯à¤¾ शैलीतून असे नाटà¥à¤¯ लिहिणे आणि सादर करणे अतà¥à¤¯à¤‚त आवà¥à¤¹à¤¾à¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• आहे. ‘यशोधरा’ साठी तà¥à¤¯à¤¾à¤‚नी केलेले सखोल संशोधन, विविध दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोनांतून केलेले चिंतन, मनन आणि वैचारिक पà¥à¤°à¤—लà¥à¤à¤¤à¤¾ यांचा हा परिपाक आहे. जे वाचकांना केवळ à¤à¤• अनà¥à¤à¤µà¤š देत नाही, तर à¤à¤• नवी वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• वैचारिक दृषà¥à¤Ÿà¥€ देते.
नाव : रामदास सांडू पाडळे
सेवानिवृतà¥à¤¤ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¸à¥‡à¤µà¤•
हे माà¤à¥‡ पहिलेच पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•.. रानोमाळ फिरून बिबीचà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¾à¤¡à¤¾à¤µà¤°à¥€à¤² गोटे बिबे तोडून आणायचे. कामठà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤° बसून गोटे फोडून तà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥€à¤² गोडांबी काढायची. व संसाराचा गाडा हाकायचा. असा परंपरागत वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ असलेलà¥à¤¯à¤¾ अजिंठा डोंगरकà¥à¤¶à¥€à¤¤à¥€à¤² आदिवासी कोळी समाजाचà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ जीवनातील सà¥à¤–-दà¥à¤ƒà¤–े, मान-अपमान, जीवन संघरà¥à¤·, तà¥à¤¯à¤¾à¤‚चे मनोविशà¥à¤µ टिपणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ केला आहे. यात कितपत यश आले, हे वाचकांनी ठरवायचे आहे.
Select at least 2 products
to compare