Additional information
| Weight | 0.300 kg |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 16 × 3 cm |
| Weight | 0.300 kg |
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| Dimensions | 24 × 16 × 3 cm |
The Gyanpeeth prize in literature in Marathi has been awarded to three saraswatas, namely shri. V.S. Khandekar, Shri. V.D. Karandikar and Kusumagraja, Shri. V. V. Shirwadkar. The life and their lifestyle can be made known through this book, the only one available in Marathi.
सत शà¥à¤°à¥€ अकाल, दास अजीत सिंह à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ सिख धरà¥à¤® के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों और गà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤£à¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ रखते हैं। आपने सिख इतिहास, गà¥à¤°à¥à¤“ं के जीवन तथा गà¥à¤°à¤®à¤¤ विचारधारा का गहन अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया है।
इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से लेखक का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी तथा जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥ पाठकों तक सिख गà¥à¤°à¥à¤“ं की शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं को सरल और सहज à¤à¤¾à¤·à¤¾ में पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¤¾ है, ताकि वे गà¥à¤°à¥ परंपरा के आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• और सामाजिक संदेश को समठसकें।
लेखक ने इससे पूरà¥à¤µ गà¥à¤°à¥ अमरदास जी (तीसरे नानक जी) के जीवन पर आधारित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• लिखी है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ सिख गà¥à¤°à¥ और मराठा संतों की सामाजिक à¤à¥‚मिका पर आधारित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• “दो धाराà¤à¤ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ाश” à¤à¥€ लिखी है।
लेखन और अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ के साथ-साथ लेखक धरà¥à¤®-पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° तथा समाज जागरण के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से संलगà¥à¤¨ हैं।
वाहेगà¥à¤°à¥ जी का खालसा।
वाहेगà¥à¤°à¥ जी की फतेह ।।
“मराठीतून जरà¥à¤®à¤¨ – शिकणं आता सौपं” “à¤à¤¾à¤·à¤¾ ही फकà¥à¤¤ संवादाचं साधन नाही ती नवà¥à¤¯à¤¾ संसà¥à¤•ृतीकडे आणि नवà¥à¤¯à¤¾ संधींकडे नेणारं दार आहे.” आज अतà¥à¤¯à¤‚त आनंद आणि अà¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ वाटतो की “जरà¥à¤®à¤¨ à¤à¤¾à¤·à¤¾ गà¥à¤°à¥” हे पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• अधिकृतपणे पà¥à¤°à¤•ाशित होत आहे. हे पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• खास मराठी विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥à¤¯à¤¾à¤‚साठी तयार केलेले आहे, जे जरà¥à¤®à¤¨ à¤à¤¾à¤·à¤¾ शिकू इचà¥à¤›à¤¿à¤¤à¤¾à¤¤ पण इंगà¥à¤°à¤œà¥€ माधà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤®à¥à¤³à¥‡ अडचण अनà¥à¤à¤µà¤¤à¤¾à¤¤. […]
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