Bhavna Rushi

30.00

Bhawana Rishi belonged to the Padmashali society of weavers who orginated the textile business and taught the skill to the people, who were later on called “Padmashali” Bhawana risi was son of the Maikandya risi. This is the first book in Marathi giving full information about his life and work. The writer Prof. Vijay Yangalwar has benefited the common man by this book.

5 in stock

SKU: Bhavna Rushi Categories: , ,
Description

Description

Bhawana Rishi belonged to the Padmashali society of weavers who orginated the textile business and taught the skill to the people, who were later on called “Padmashali” Bhawana risi was son of the Maikandya risi. This is the first book in Marathi giving full information about his life and work. The writer Prof. Vijay Yangalwar has benefited the common man by this book.

Additional information

Additional information

Weight 50 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
More Products

Kahani Jiddichi

300.00

कहाणी जिद्दीची ही कादंबरी एका सालस तरुणीची कथा आहे. केवळ मुलगा चांगला आहे म्हणून आई वडिलांच्या आग्रह खातर ती विवाहाला तयार होते. शिक्षण पुढे सुरु ठेवता येईल हीच त्यातली जमेची बाजू. तसं ती विवाहानंतर हवं त्या क्षेत्रातील, आणि हवं तेव्हढं शिक्षण घेते देखील. पण नवऱ्याच्या लहरी स्वभावाने तिला काय काय भोगाव लागतं… जेव्हा तिच्या सहनशीलतेचा अंत होतो आणि तिच्या जीवावर बेततं तेव्हा मात्र घर सोडून बाहेर पडण्याशिवाय पर्याय नसतो. सगळं संपलेलं असताना फिनिक्स पक्षाप्रमाणे ती पुन्हा राखेतून उभी राहते. एकल पालकत्व निभावत पुढे जात राहते.उच्च विद्या विभूषित असलेल्या स्त्रीने प्रत्यक्षात अनुभवलेलं हे सारं … म्हणून तिच्या या जिद्दीची ही कहाणी .

Yashashvi Honarach

70.00

The book is dedicates to the norms of enhancing self confidence and rightful positive thinking in the students, so as to face any problem.

Bhagyaresha

150.00

“‘भाग्यरेषा’ काव्यसंग्रहाची खास वैशिष्ट्ये

निसर्गाचा आल्हाद आणि बदलते रूप

सामाजिक जीवनातील खदखद व वास्तव

आध्यात्मिक उंची आणि अंधश्रद्धेवर प्रहार

स्त्रीचे रूप, व्यथा आणि सामर्थ्य

भ्रष्टाचार, राजकारण, शेतकरी व समाजातील समस्या

भावनांची विविधता – कोमल भावस्पर्शी कविता, तितक्याच प्रभावी सामाजिक आणि विचारप्रवर्तक कविता.

अद्वितीय शब्दफेक आणि लयबद्धता – प्रत्येक कवितेतून उमलणारा नवा भावार्थ.

‘भाग्यरेषा’ : जीवनाचे सार शब्दबद्ध करणारा काव्यसंग्रह”

German Bhasha Guru

250.00

“मराठीतून जर्मन – शिकणं आता सौपं” “भाषा ही फक्त संवादाचं साधन नाही ती नव्या संस्कृतीकडे आणि नव्या संधींकडे नेणारं दार आहे.” आज अत्यंत आनंद आणि अभिमान वाटतो की “जर्मन भाषा गुरु” हे पुस्तक अधिकृतपणे प्रकाशित होत आहे. हे पुस्तक खास मराठी विद्यार्थ्यांसाठी तयार केलेले आहे, जे जर्मन भाषा शिकू इच्छितात पण इंग्रजी माध्यमामुळे अडचण अनुभवतात. […]

Jagatik Khagolshatradnya

150.00

The world astronomers listed in this book belong to the ancient times. Inall 49 astronomirs have been described who have added valuable knowledge to the science. The work they had done along with their life stories can be read in this book. There are 13 Indian astronomers among 49 in total. Shri. Prakash Manikpure is the writer of the book.

Manakshar

249.00

पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।