Co-operative Rules

250.00

The changed Co-operative Rules after change in Co-operative 1920 due to constitutional a amendment are may must required by the Co-operative Societies. This is our efftort to do the needful.

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Description

Description

The changed Co-operative Rules after change in Co-operative 1920 due to constitutional a amendment are may must required by the Co-operative Societies. This is our efftort to do the needful.

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Weight 250 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Manakshar

249.00

पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।

Chakrvyuh

250.00

‘चक्रव्यूह’ ही एक रहस्य, थरार आणि गूढतेने भरलेली कादंबरी आहे, जिच्या केंद्रस्थानी आहे – एक रहस्यमय मृत्यू, जो केवळ एका माणसाचा नाही, तर अनेकांच्या आयुष्याला हादरवून टाकतो.

एका नामवंत आणि लोकांच्या मनात विशेष स्थान असलेल्या तंत्र-मंत्र व तांत्रिक विद्या निपुण स्त्रीचा मृत्यू आत्महत्येसारखा दिसतो. पण हा फक्त योगायोग आहे का, की ही आहे एक काळजीपूर्वक आखलेली योजना?

या प्रकरणाचा तपास घेतो सिनिअर इन्स्पेक्टर अजिंक्य वाघमारे – धारदार बुद्धी, थंड डोकं आणि झपाटलेली निष्ठा असलेला एक तगडा अधिकारी. तपासाची सुरुवात साधी वाटत असली, तरी जसजसे धागे उलगडायला लागतात, तसतसे अजिंक्य एका अंधाऱ्या आणि अनाकलनीय चक्रव्यूहात अडकत जातो.

या चक्रव्यूहात आहेत –

मुखवटे घातलेली माणसं,

बाहेरून साधी वाटणारी पण आतून धोकादायक पात्रं,

तांत्रिक शक्तींचा वापर करून खेळला गेलेला मानसिक खेळ,

आणि एक असा शत्रू, जो दिसत नाही… पण प्रत्येक पावलावर सावलीसारखा उपस्थित आहे.

ही कथा आहे विश्वास आणि फसवणूक, तंत्र आणि तपास, गुन्हा आणि गूढतेच्या सीमारेषांवर चालणाऱ्या शोधयात्रेची.

‘चक्रव्यूह’ वाचताना तुम्हाला प्रत्येक पानावर नवीन प्रश्न पडेल… आणि शेवटी उलगडेल एक धक्का देणारे सत्य, जे कदाचित कुणालाही अपेक्षित नसेल!

Gadgebabanchya Sahvasat

60.00

Gadge Baba was not an organizer of propagator of the religion or a saint. He was social worker who moved in the society and taught people about social uplift and the methods to be observed for it. He taught the people the fundamental and basic links of life and worked as an angel. He was moving educational institute, who worked alone, and made people to follow him for the cause of society. The book tells about the experiments made him and the odds faced by him. The information in the book would benefit social workers in particular.

Gosukte

60.00

There is ample literature writer by larned and great thinkers in India. In this book, we get a complied account about it.

Patsansthansathi Sahakari Paripatrake

350.00

The circulars for the co-operative financial fields, particularly during last twenty years are grouped in this book. There are in all 106 circulars included in the book. There are 160 pages in the smallest size 1/8 decimal. The book is thus made handy and easy to carry with 80 as to be used when needed.