Kamtha

250.00

नाव : रामदास सांडू पाडळे

सेवानिवृत्त ग्रामसेवक
हे माझे पहिलेच पुस्तक.. रानोमाळ फिरून बिबीच्या झाडावरील गोटे बिबे तोडून आणायचे. कामठ्यावर बसून गोटे फोडून त्यातील गोडांबी काढायची. व संसाराचा गाडा हाकायचा. असा परंपरागत व्यवसाय असलेल्या अजिंठा डोंगरकुशीतील आदिवासी कोळी समाजाच्या स्त्री-पुरुषांच्या जीवनातील सुख-दुःखे, मान-अपमान, जीवन संघर्ष, त्यांचे मनोविश्व टिपण्याचा प्रयत्न केला आहे. यात कितपत यश आले, हे वाचकांनी ठरवायचे आहे.

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नाव : रामदास सांडू पाडळे

सेवानिवृत्त ग्रामसेवक
हे माझे पहिलेच पुस्तक.. रानोमाळ फिरून बिबीच्या झाडावरील गोटे बिबे तोडून आणायचे. कामठ्यावर बसून गोटे फोडून त्यातील गोडांबी काढायची. व संसाराचा गाडा हाकायचा. असा परंपरागत व्यवसाय असलेल्या अजिंठा डोंगरकुशीतील आदिवासी कोळी समाजाच्या स्त्री-पुरुषांच्या जीवनातील सुख-दुःखे, मान-अपमान, जीवन संघर्ष, त्यांचे मनोविश्व टिपण्याचा प्रयत्न केला आहे. यात कितपत यश आले, हे वाचकांनी ठरवायचे आहे.

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Weight 0.300 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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Jagatik Khagolshatradnya

150.00

The world astronomers listed in this book belong to the ancient times. Inall 49 astronomirs have been described who have added valuable knowledge to the science. The work they had done along with their life stories can be read in this book. There are 13 Indian astronomers among 49 in total. Shri. Prakash Manikpure is the writer of the book.

Lagnachi Purvatayari

30.00

The marriage in Hindu society is full of many events which are to be performed rituals stically. We get information about them in detail and the serial form of events and their requirements in this book.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।