Karan Karya Siddhant

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डॉ. सुनीलदत्त गवरे यांचे “कारणकार्याविषयीचे” हे लेखन अनेक कारणांनी महत्त्वपूर्ण आणि स्तुत्य ठरते. निवडलेला विषय तत्त्वज्ञानाच्या अभ्यासात मूलभूत असून, मराठीत त्यावर सविस्तर विवेचन क्वचितच आढळते. या ग्रंथात पाश्चात्य आणि पौर्वात्य तत्त्वज्ञानातील कारणसंकल्पना सखोल, साधार व अभ्यासपूर्ण पद्धतीने स्पष्ट केली आहे.

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Description

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डॉ. सुनीलदत्त गवरे यांचे “कारणकार्याविषयीचे” हे लेखन अनेक कारणांनी महत्त्वपूर्ण आणि स्तुत्य ठरते. निवडलेला विषय तत्त्वज्ञानाच्या अभ्यासात मूलभूत असून, मराठीत त्यावर सविस्तर विवेचन क्वचितच आढळते. या ग्रंथात पाश्चात्य आणि पौर्वात्य तत्त्वज्ञानातील कारणसंकल्पना सखोल, साधार व अभ्यासपूर्ण पद्धतीने स्पष्ट केली आहे.

हे पुस्तक आयुर्वेद, विज्ञान, मानसशास्त्र, सांख्यिकी, अर्थशास्त्र, व्यवस्थापन, धर्मशास्त्र (भगवद्गीता), न्यायवैद्यक आदी विविध क्षेत्रांमधील कारणकार्यासंबंधांचा विस्तृत वेध घेते. कारणकार्याचे स्वरूप, त्याचे उपयोजन, प्रचलित-अप्रचलित वादविवाद व मतवैविध्य या सर्वांचा साक्षेपी विचार येथे आढळतो.

मराठीतून तत्त्वज्ञान शिकणाऱ्या व शिकवणाऱ्या विद्यार्थ्यांसाठी हे पुस्तक विशेष उपयुक्त ठरते. लेखकाच्या मार्गदर्शनाखाली होत असलेले संशोधनकार्य आणि त्यांची अभ्यासशील मांडणी यामुळे या विषयावर अधिक चिंतन व संशोधनाला चालना मिळेल, अशी अपेक्षा आहे.

हे लिखाण जिज्ञासूंना कारणकार्य या संकल्पनेचे वैपुल्य समजून घेण्यासाठी एक महत्त्वाची दिशा दाखवणारे ठरेल.

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Weight 0.250 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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