Khajgi Mahavidyalayanche Vyavasthapan V Prashasan

250.00

Day by day the member of private collages developing. Simultaneously problems about their management is also growing fast. This is a key book for this purpose.

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Description

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Day by day the member of private collages developing. Simultaneously problems about their management is also growing fast. This is a key book for this purpose.

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Weight 300 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
More Products

Mrutunjay Markandeya Rushi

120.00

Markendeya rishi had become immortal by conquering the Death. He is the racegod of Padmshali Society. The life story of the ancients rishi, the fight and devotion of him along with the places where the temples are built for him, the pilgrims at the particular places etc are described in this book in detail. Shri. Vijay Yangalwar.

Jagatik Varsa Sthalancha Itihas

200.00

“जागतिक वारसा स्थळांचा इतिहास महाराष्ट्राच्या विशेष संदर्भासह” या पुस्तकात केवळ माहिती ची जंत्री नाही, तर यात सामाजिक इतिहासाच्या अनुषंगाने, पर्यटन भूगोलाचा विचार करून, सामान्य मध्यवर्गीयाच्या खिशाच्या अर्थशास्त्राच्या दृष्टीने व पर्यटन करणाऱ्याच्या मानसिकतेचा- मानसशास्त्राचा वेध घेण्याचा प्रयत्न करणारे हे 100-125 पानांचे छोटेखानी पुस्तक आहे. या सामाजिकशास्त्रांचा विचार करताना जागतिक वारसा का ? कसा ? कशा रितीने ? जपला पाहिजे. या प्रश्नांचा उत्तरांचा मागोवा घेण्याचा प्रामाणिक प्रयत्न या पुस्तकात केलेला आहे.
….प्रा.विजयकुमार विनायक भवारी

Bhartachi Avkash Jhep

120.00

India has recently leaped in the space and has placed itself in the major 5-6 powerful countries. By developing our own space-technology, India has established a series of satellites in space besides helping other countries in this field. The fullscaped information about Indias space ship campaign can be made known through this book. The book is interesting informative and thrilling.

Kamtha

250.00

नाव : रामदास सांडू पाडळे

सेवानिवृत्त ग्रामसेवक
हे माझे पहिलेच पुस्तक.. रानोमाळ फिरून बिबीच्या झाडावरील गोटे बिबे तोडून आणायचे. कामठ्यावर बसून गोटे फोडून त्यातील गोडांबी काढायची. व संसाराचा गाडा हाकायचा. असा परंपरागत व्यवसाय असलेल्या अजिंठा डोंगरकुशीतील आदिवासी कोळी समाजाच्या स्त्री-पुरुषांच्या जीवनातील सुख-दुःखे, मान-अपमान, जीवन संघर्ष, त्यांचे मनोविश्व टिपण्याचा प्रयत्न केला आहे. यात कितपत यश आले, हे वाचकांनी ठरवायचे आहे.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।