Additional information
| Weight | 50 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 50 kg |
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| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
To decide rate of interest or rate of interest on the loan, the initial price of that product or service is important and must be known. Therefore price fixation is important for working in banks and some such institutions. This book is useful for it.
Gurucharitra is a devine treatise read in India, there are some hard ritualistic practices whichare to be folloved by the reader, hence many people dont read it. Women are prohibeted for its reading. Yet all of us have curiosity to know about Gurucharitra Shri. Bal Panchbhai has canverted the secred into a book so that one can read and follow the advice in it, It is a translation of the original quazi-poetic treatise in simple prose, which can be read by anyone at anyplace and anytime. The meaning of the secret and sacred original text is made avialable by this book to all.
अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।
अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।
This book in Hindi is about Maharshi Kanik who was India’s grate political advisor. Political, commercial, industrial management guideline from Indian point a view are found in it, while studying about for thinking one can know precious vision of Indians simultaneously.
The nobel prize is the highest one offered to the laureates in the field of literature, science, philosophy etc. The book gives information about the beginning of the prize, and also about these who have won it. The book is one such document in Marathi that everyone must read. Writer Prakash Manikpure
‘चक्रव्यूह’ ही एक रहस्य, थरार आणि गूढतेने भरलेली कादंबरी आहे, जिच्या केंद्रस्थानी आहे – एक रहस्यमय मृत्यू, जो केवळ एका माणसाचा नाही, तर अनेकांच्या आयुष्याला हादरवून टाकतो.
एका नामवंत आणि लोकांच्या मनात विशेष स्थान असलेल्या तंत्र-मंत्र व तांत्रिक विद्या निपुण स्त्रीचा मृत्यू आत्महत्येसारखा दिसतो. पण हा फक्त योगायोग आहे का, की ही आहे एक काळजीपूर्वक आखलेली योजना?
या प्रकरणाचा तपास घेतो सिनिअर इन्स्पेक्टर अजिंक्य वाघमारे – धारदार बुद्धी, थंड डोकं आणि झपाटलेली निष्ठा असलेला एक तगडा अधिकारी. तपासाची सुरुवात साधी वाटत असली, तरी जसजसे धागे उलगडायला लागतात, तसतसे अजिंक्य एका अंधाऱ्या आणि अनाकलनीय चक्रव्यूहात अडकत जातो.
या चक्रव्यूहात आहेत –
मुखवटे घातलेली माणसं,
बाहेरून साधी वाटणारी पण आतून धोकादायक पात्रं,
तांत्रिक शक्तींचा वापर करून खेळला गेलेला मानसिक खेळ,
आणि एक असा शत्रू, जो दिसत नाही… पण प्रत्येक पावलावर सावलीसारखा उपस्थित आहे.
ही कथा आहे विश्वास आणि फसवणूक, तंत्र आणि तपास, गुन्हा आणि गूढतेच्या सीमारेषांवर चालणाऱ्या शोधयात्रेची.
‘चक्रव्यूह’ वाचताना तुम्हाला प्रत्येक पानावर नवीन प्रश्न पडेल… आणि शेवटी उलगडेल एक धक्का देणारे सत्य, जे कदाचित कुणालाही अपेक्षित नसेल!
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