ON THE ROAD A Pan-India Quest

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A Journey from Frontier to Frontier:  Across the Soul of India

From the Eastern Dawn to the Western Horizon and from Kashmir’s icy heights to Kanyakumari’s oceanic edge, this book is a breathtaking chronicle of one man’s self-driven odyssey across India’s vast and varied frontiers. Through vivid reflections and sharp-eyed observations, the author captures the pulse of the highways, the warmth of the people, and the raw beauty of India’s landscapes. This is not just a travelogue, it’s a celebration of India’s spirit, stitched together by the roads that bind it.

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Weight 0.300 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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Kitkanchi Navlai

115.00

The life cycle of man depends on many factors in which insects are also included. They also play a majer role either in creative or destructive manner. We get ample information about them in this book. A wonderful world of lookwarm, spider, cockroch, house fly, mosquitos, beetles is explained in simple words. Writer Prof. Sudheer Sahasrabuddhe.

Sahakar Kaydyatil Nave Badal

200.00

The changes in the co-operative laws according to the 97 amendment in the constitutions of India with simplifications of laws is available in this book.

Puran Parichay

50.00

In this book all the eighteen Puranas have been describes as to become available to the new generation. It includes the historical information side by side.

Hasyabodh

200.00

प्रा. सुरेश खेडकर
हास्यबोध म्हणजे नागपूरच्या दैनिक देशोन्नती मध्ये विसेक वर्षांपूर्वी रविवार पुरवणीत प्रकाशित झालेल्या याच नावाच्या लेख मालिकेत माझे मित्र प्रा. सुरेश खेडकर यांनी वर्षभर सातत्याने लिहिलेल्या लेखांचा संग्रह. त्यावेळी मी देशोन्नतीचा पुरवणी संपादक होतो. आचार्य प्र. के. अत्रे यांच्या झेंडूची फुले, या विडंबन कवितासंग्रहाची परंपरा सक्षमतेने सांभाळणारा प्रा. सुरेश खेडकर यांचा एप्रिल फुले, हा विडंबन कवितांचा संग्रह १९८३ मध्ये प्रकाशित झाला होता. त्याची प्रस्तावना सुध्दा मीच लिहिली होती.
त्याचाच धागा धरून मी कवी मित्र सुरेश खेडकर यांनी एखादे विनोदी सदर देशोन्नतीसाठी लिहावे, असा आग्रह धरला. वाचकांना हास्यांकित करून त्यांचे मनोरंजन करणारा विनोदी किस्से व त्यातूनच सध्याच्या आधुनिक परिस्थितीत “शहाणे करूनी सोडावे सकल जन” याप्रमाणे सहजतेने शहाणपणाचा डोस देणारा बोध यांचा संगम घडविणाऱ्या हास्यबोध या मालिकेचा जन्म झाला. हास्यबोधची लोकप्रियता दिवसेंदिवस वाढत गेली. अल्पशिक्षित उच्चशिक्षित, विद्यार्थी, शिक्षक, वार्ताहर, पोलीस कॉन्स्टेबल, वकील, व्यापारी, ऑटोचालक इत्यादी विविध व्यवसायातील वाचकांचा उदंड प्रतिसाद या सदाला त्यावेळी मिळाला. तसाच चांगला प्रतिसाद या पुस्तकालाही मिळेल, याची मला खात्री आहे. शाळा कॉलेजातील विद्यार्थी व विभिन्न स्तरांचे कर्मचारी यांच्या ट्रेनिंग प्रोग्राम मध्ये हास्यबोध नक्कीच उपयुक्त ठरेल.
प्रा. सुरेश खेडकर यांचे विषयांतर हे आणखी एक पुस्तक हास्यबोध सह प्रकाशित होत आहे. त्याबद्दलही त्यांचे हार्दिक अभिनंदन.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।