Sant Gajanan Maharaj

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Weight 100 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Ass Na Kay!

₹275.00

लेखक परिचय –
महाविद्यालयीन शिक्षण पूर्ण केल्यानंतर काही वर्ष अभाविप या विद्यार्थी संघटनेत पूर्णवेळ काम केले. विद्यार्थी चळवळीत काम करत असताना आसपास घडणाऱ्या छोट्या मोठ्या घटनांकडे पाहण्याचा दृष्टीकोन अधिकाधिक सजग होत गेला. त्यातून मनात उमटणारे तरंग शब्दबद्ध करून कागदावर उतरविण्याचा छंद जडला. आतापर्यंत त्यांची चार पुस्तके प्रकाशित झाली आहेत.
सुहास वैद्य
त्यांच्या ‘वैदेही’ कादंबरीत, उत्तर रामायणात; पुन्हा एकदा वनवास स्वीकारावा लागलेली सीता तत्कालीन समाजाच्या चालीरीतींकडे कशी पाहते ? त्यावेळी सीतेच्या मनात उमटणाऱ्या भाव भावना कशा असतील ? याचे शब्दचित्र रेखाटतांना एका अतिशय वेगळ्या पैलूंचे दर्शन घडते.
‘पत्थर पायातील’; या लेख संग्रहात त्यांना भेटलेल्या विविध लोकांच्या वक्ती विशेषत्वाचे सुंदर चित्रण केले आहे. तिसरे पुस्तक ‘शोधू चिंतनाचे रंगी’, हे त्यांच्या आसापास घडणाऱ्या घटनांचा त्यांनी मांडलेला साक्षेपी लेखाजोखा आहे. त्याला पुरस्कार मिळाला असून चौथे पुस्तक ‘बदलांचे पायरव’ हे एका ध्येयाने अंतरबाह्य प्रेरित झालेल्या चमूचे सांगोपांग वर्णन आहे. दोन गावात फक्त वैद्यकीय सेवा देत असताना येणाऱ्या रुग्णांनी न सांगितलेल्या पण त्या पलीकडे जाणवलेल्या समस्या सोडवणारी एक संस्था आज महाराष्ट्रभर आपल्या निर्व्याज, निर्लेप कार्याचा कसा ठसा उमटवते याचे सुंदर वर्णन वाचायला मिळते.
असं न् काय !
लेखकाचा हा बालकथा संग्रह म्हणजे बालसाहित्यातील पहिले पाऊल आहे. आजीने सांगितलेल्या आणि तत्कालीन कौटुंबिक संस्कार प्रयोगशाळेतील यशस्वी ठरलेल्या कथांचा हा संग्रह आहे. कथा छोट्या छोट्या पण बालमनावर मूल्याधिष्ठित संस्कार करणाऱ्या आहेत. त्यांच्या चारही पुस्तकांचे वाचकांनी भरभरून स्वागत केले आहे. लेखकाची लेखनशैली पाहता या पुस्तकाला सुद्धा वाचकांचा भरघोस प्रतिसाद मिळेल अशी खात्री आहे.

Bhartachi Rashtriy Pratike

₹50.00

As a responsible citizen each one needs to now about the symbols of and about India. The coming generation can get it through this book so as to feel proud about India. The pictures information of the 20 symbols are beautiful and representing India’s cultural reference.

Bhajnanand

₹200.00

A great Devotee Neetatai Pulliwar has written some devotional songs/bhajanas. This is a book of them. Goden Sharda, Guru devine teacher, God Datta, God Vitthal are the subject of the poems which can be sung.

Nobel Jagajjete

₹330.00

The nobel prize is the highest one offered to the laureates in the field of literature, science, philosophy etc. The book gives information about the beginning of the prize, and also about these who have won it. The book is one such document in Marathi that everyone must read. Writer Prakash Manikpure

Ardas

₹165.00

सत श्री अकाल, दास अजीत सिंह भल्ला सिख धर्म के सिद्धांतों और गुरुबाणी के प्रति गहरा विश्वास रखते हैं। आपने सिख इतिहास, गुरुओं के जीवन तथा गुरमत विचारधारा का गहन अध्ययन किया है।
इस पुस्तक के माध्यम से लेखक का उद्देश्य युवा पीढ़ी तथा जिज्ञासु पाठकों तक सिख गुरुओं की शिक्षाओं को सरल और सहज भाषा में पहुँचाना है, ताकि वे गुरु परंपरा के आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश को समझ सकें।
लेखक ने इससे पूर्व गुरु अमरदास जी (तीसरे नानक जी) के जीवन पर आधारित पुस्तक लिखी है। इसके अतिरिक्त सिख गुरु और मराठा संतों की सामाजिक भूमिका पर आधारित पुस्तक “दो धाराएँ एक प्रकाश” भी लिखी है।
लेखन और अध्यापन के साथ-साथ लेखक धर्म-प्रचार तथा समाज जागरण के कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।
वाहेगुरु जी का खालसा।
वाहेगुरु जी की फतेह ।।

Akhand Bharat ke Swar

₹200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।