Shabdanch jagan

150.00

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Description

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प्रा. सुरेश माधवराव नारायणे मुळ विंचूरचे पण आता नांदगाव जि. नाशिक येथील हे संवेदनशील आणि जीवनाभिमुख लेखन करणारे कवी आहेत. बालपणापासूनच आलेल्या संघर्षांनी त्यांच्या व्यक्तिमत्त्वाला आकार दिला आणि त्या अनुभवांचं प्रतिबिंब त्यांच्या लेखणीत स्पष्टपणे दिसून येतं. त्यांचे मनोमनी ललित लेख संग्रह आणि काव्य झुला काव्यसंग्रह वाचकांच्या साठी एक साहित्यिक शिदोरी ठरली आहे. आता हे तिसरे “शब्दांचं जगणं” या त्यांच्या कवितांमध्ये, भक्तिपर, प्रेम, विरह, सामाजिक जाणीवा आणि वास्तव जीवनातील संघर्ष यांचा प्रभावी संगम आढळतो. साधी, ओघवती आणि मनाला भिडणारी भाषा ही त्यांच्या लेखनाची खासियत आहे.
कवी संमेलनांतून सादरीकरण करताना ते श्रोत्यांच्या मनात थेट घर करतात. “शब्दांचं जगणं” या काव्यसंग्रहातून त्यांनी आपल्या जीवनातील अनुभवांना आणि भावविश्वाला प्रभावी शब्दरूप दिलं आहे. त्यांच्या या काव्यसंग्रहाचे स्वागत… या पुढे त्यांच्या हातुन अधिक समाजाभिमुख कविता लिहिली जावी या साठी शुभेच्छा !!

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Weight 0.250 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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Swapna Sanket

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Omens through the dreams are always treated as the product of unconscious or sub-conscious mind. But they present some hints too through them. One must try to understand them in reference to past and coming future. The dreams of self and that of others can become a guiding line for the successfully life for today and future

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This is the most important among all upnishadas. It has been translated in Marathi by B. R. Modak is easy and current language.

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पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।