Additional information
| Weight | 200 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 200 kg |
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| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
“भारतीय ज्ञान परंपरा: एक दृष्टिक्षेप” हे पुस्तक भारतभूमीच्या अखंड आणि समृद्ध बौद्धिक वारशाचा परिचय करून देणारे आहे. भारताचा इतिहास हा केवळ साम्राज्यांचे उदय-अस्त आणि युद्धांचे जय-पराजय यापुरता मर्यादित नसून, तो ज्ञान, तत्त्वज्ञान, विज्ञान, कला आणि संस्कृतीचा अखंड प्रवाह आहे. या ग्रंथातून वाचकाला वेद, उपनिषदे, पुराणकथा, प्राचीन तत्त्वज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, रसायनशास्त्र, धातुविज्ञान, कला, वास्तुकला तसेच तक्षशिला-नालंदा यांसारख्या विद्यापीठांची ओळख होईल.
The book is written in the International year for mathematics in which Nachiket Publishing has paid homage to all mathematicians in the world from ancient period to the modern times. There is information about 100 mathematicians made avialable for the first time in Marathi. Writer Prakash Manikpure.
अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।
अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।
डॉ. इंद्रायणी केदार जोशी
बी.ए.एम.एस., एम.डी. (आयु.) स्वस्थवृत्त एवं योग, डी.वाय.एन.डी. (योग, निसर्गोपचार एवं आहार विशेषज्ञ)
समग्र आरोग्य व जीवनशैली मार्गदर्शक विशेषज्ञ
आयुर्वेद व योग शास्त्रात अध्यापन, संशोधन व आरोग्य जनजागृती क्षेत्रात सक्रिय योगदान
इवा कॉलेज ऑफ आयुर्वेद येथे स्वस्थवृत्त एवं योग विभागात सहाय्यक प्राध्यापिका म्हणून कार्यरत
भारतीय शास्त्रीय संगीतावर आधारित संगीतोपचार तज्ञ (Clinical Music Therapist)
“कैवल्यनाद वेलनेस फाउंडेशन” (Music Therapy Education & Research Centre) संस्थापिका
“कैवल्यनाद म्युझिक अकॅडमी” संस्थापिका
कैवल्यनाद वेलनेस फाउंडेशन च्या म्युझिक थेरपी प्रमाणपत्र अभ्यासक्रमांच्या संचालिका व प्रशिक्षक
योग, मर्म थेरपी व गर्भसंस्कार विशेषज्ञ व प्रशिक्षक
आयुर्वेद, संगीतोपचार व समग्र आरोग्य विषयांवरील लेखिका व संशोधक
अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडळ, मिरज येथून “संगीत विशारद” आणि “संगीत अलंकार” (गायन) पदवी प्राप्त
महाराष्ट्र सुगम संगीत समिती, मुंबई- पुणे येथून “संगीत रत्न” (सुगम संगीत) पदवी प्राप्त
प्रकाशित पुस्तकेः
अनुभवांच्या आठवणी – मराठी काव्यसंग्रह (२०१५)
हृदयाची भावफुले मराठी काव्यसंग्रह (२०२०)
पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।
The related policies and decisions about the personnel (individual) from his/her appointment, to retirement are discussed in this book viz personnel setup, the responsibilty and accountability of the employee at each level, recrutment methods, promotion system, transfer rules of casual and other leaves, disciplinary laws, secret reporting, financial benifits, laws to be followed, workers organizaiton, contribution of the employees in management etc., are discussed in detail.
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