Snehabandh

350.00

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नन्दकिशोर रघुनाथ पत्तरकिने
७ सप्टेंबर १९४५
एम. ए. (इंग्रजी साहित्य, संस्कृत, भाषाविज्ञान) साहित्यरत्न (हिन्दी) शास्त्री (संस्कृत) इंग्रजी अध्यापन पदविका, उच्च जर्मन पदविका, फ्रेन्च व तेलगु प्रमाणपत्र
◆ संस्थाकार्य –
कार्यवाह, संस्कृत-भाषा-प्रचारिणी सभा, नागपूर.
कार्यकारी संपादक.
संस्कृत भवितव्यम्
सदस्य, संस्कृत अध्ययन मंडल
अमरावती विद्यापीठ •
सहयोगी अध्यापक पदव्युत्तर भाषाविज्ञान विभाग, नागपूर विद्यापीठ
अभ्यागत
अध्यापक क्रियात्मिका आंग्ली समर्थ महाविद्यालय, लाखनी
सदस्य अध्ययन मंडल
व विद्याशाखा पत्रकारिता माध्यम व संचार, कविकुलगुरू कालिदास ‘संस्कृत
विश्वविद्यालय,’ रामटेक.
परिषदांतील –
अखिल भारतीय प्राच्यविद्या- सम्मेलन
उपस्थिति
विश्व संस्कृत सम्मेलन
अखिल भारतीय संस्कृत पत्रकारिता सम्मेलन
प्रकाशने
Rambler’s Ride
पत्रकारिता प्रपञ्चः (Jottings on Journalism).
Readings in Sanskrit Journalism
प्राच्यप्रभा भारतविद्या च (Oriente Lux and Indology)
◆ प्राप्तसम्मान –
महाराष्ट्र राज्य संस्कृत पुरस्कार १९९४, “संस्कृत-मित्रम्”
राष्ट्रीय पुरस्कार २००३ विशिष्ट संस्कृत सेवाव्रती सम्मान
राष्ट्रीय पुरस्कार २०१८ ‘भारतीयविद्याविभूतिः’ सम्मान अखिल भारतीय विद्वत्परिषद, बेंगलुरू २०२४
उपजीविकावृत्ति –
भारतीय रिज़र्व बँक (१९६५-२००३)

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Weight 0.300 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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नाव : डॉ. सुनिता गजभिये
शिक्षण : एम.बी.बी.एस., एम.डी. सूक्ष्मजीवशास्र   (Microbillogy)
व्यवसाय : प्राध्यापिका, सूक्ष्मजीवशास्त्र विभाग
शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, नागपूर
आवड : मराठी, हिंदी आणि इंग्रजी भाषेत
अनेक कविता लिहिल्या आहेत

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पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।