Chanakshya Palkano Chanakya vya .. Chanakyaniti var shaishnik margdarshan

250.00

Compare
SKU: 591 Categories: ,
Additional information

Additional information

Weight 0.300 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
More Products

Bhartiya Ganiti

180.00

The wisdom of the Indians is being established in the world again. The Indian thinking linked with mathematics is a wellknown fact. There are many laureat mathematicians in India who had contributed in the field of mathematics from time to time. 51 such laureats have been informed about in this book to modern reader with their contribution, timespan and life by Shri. Anant Vyavahare. By reading this book, Indian citizen world develop a feeling of being proud of them.

Bhagyaresha

150.00

“‘भाग्यरेषा’ काव्यसंग्रहाची खास वैशिष्ट्ये

निसर्गाचा आल्हाद आणि बदलते रूप

सामाजिक जीवनातील खदखद व वास्तव

आध्यात्मिक उंची आणि अंधश्रद्धेवर प्रहार

स्त्रीचे रूप, व्यथा आणि सामर्थ्य

भ्रष्टाचार, राजकारण, शेतकरी व समाजातील समस्या

भावनांची विविधता – कोमल भावस्पर्शी कविता, तितक्याच प्रभावी सामाजिक आणि विचारप्रवर्तक कविता.

अद्वितीय शब्दफेक आणि लयबद्धता – प्रत्येक कवितेतून उमलणारा नवा भावार्थ.

‘भाग्यरेषा’ : जीवनाचे सार शब्दबद्ध करणारा काव्यसंग्रह”

Doctorji Aani Guruji : Aaglyaveglya Athavni

130.00

Rashtriya Swayamsevak Sangh (R.S.S.) was established at Nagpur, so the Nagpuriayans particularly swayamsevakas came in personal contact with Shri. Guruji, the original general secretary of R.S.S. and the unitial swayamsevak for children was Shri. S.B.Varnekar titled as Pragnyabharati. Here many unheard and untold memories about these two respected persons are told. One can understand these highly spririted personalities. The writing is interesting and inspiring.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।