Dhammapada Ani Mulya Vichar

400.00

नावः प्रा.डॉ. ईश्वर तुकारामजी नंदपुरे
जन्मस्थळः 1.9.1948, भंडारा जिल्ह्यातील आकोट (विदर्भ)
शिक्षणः एम.ए.(मराठी वाङ्मय, आंबेडकर विचारधारा, गांधी विचार धारा) एम.कॉम्‌‍., एम. एड्., एम.एस.डब्ल्यू., एच.डी.एड्.,
बी.एड्., एच.एम.डी.एस्‌‍, पंडित (हिंदी वाङ्मय),
पी.एच.डी. (मराठी वाङ्य);
पीएच्‌‍.डी. (शिक्षणशास्त्र), पत्रकारिता.
व्यवसायः निवृत्त व्याख्याता (मराठी) एस.के. पोरवाल महाविद्यालय, कामठी (नागपूर)
Compare
SKU: 618 Category:
Description

Description

“धम्मपदाचा अभ्यासू सर्वधर्म समभाव राखू शकतो. तो संकुचित वृत्तीचा होऊ शकणार नाही. संबंध धम्मपदात असे एकही वाक्य आढळले नाही की, जे मला हिंदू या नात्याने मानवणार नाही.”
“आज आपण गौरवपूर्वक म्हणू शकतो, की भारताची जगाला जर कोणती सर्वोत्तम देणगी असेल, तर ती आहे भगवान बुद्ध. ते येथल्या समाजाचे सर्वोत्तम प्रतिनिधी होते. भारताचा इतिहास जो जाणतो, त्याला माहित आहे की, विचारसंघर्ष भरपूर झाला असला तरी बौद्ध धर्माचा जो सर्वोत्तम अंश होता, तो आम्ही पूर्ण मान्य केला.‌’ (धम्मपदंनवसंहिता)

Additional information

Additional information

Weight 0.300 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
More Products

Adbhut Pakshi Vishwa

140.00

How does a bird fly? How does it build a nest and how their breeding takes place are the queries of inquisitive men. In this book many such questions are answered. The collective life of the birds the meaning of their different chatter, twitter or tweet and other sounds made by them are the matters discussed with the scientific biological knowledge by Dr. Mrs. Pratibha Sahasrabuddhe in this book. We get knowledge of the Bird Kingdom through it.

Samruddhisathi Istrayali Tantradnyane

100.00

Isreal is a country wellknow for the practice of different techinigues in different fields of life the proparity due to it with progress has become a Keyword for Israel. What are the reasons behind this progress and prospaurity them all times is a motto, the writer wants to be adopted by Indians. This is the main reason for which the book is written by leiturent Padmakar Deshpande.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।