Bhagyaresha

₹150.00

“‘भाग्यरेषा’ काव्यसंग्रहाची खास वैशिष्ट्ये

निसर्गाचा आल्हाद आणि बदलते रूप

सामाजिक जीवनातील खदखद व वास्तव

आध्यात्मिक उंची आणि अंधश्रद्धेवर प्रहार

स्त्रीचे रूप, व्यथा आणि सामर्थ्य

भ्रष्टाचार, राजकारण, शेतकरी व समाजातील समस्या

भावनांची विविधता – कोमल भावस्पर्शी कविता, तितक्याच प्रभावी सामाजिक आणि विचारप्रवर्तक कविता.

अद्वितीय शब्दफेक आणि लयबद्धता – प्रत्येक कवितेतून उमलणारा नवा भावार्थ.

‘भाग्यरेषा’ : जीवनाचे सार शब्दबद्ध करणारा काव्यसंग्रह”

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“‘भाग्यरेषा’ काव्यसंग्रहाची खास वैशिष्ट्ये

निसर्गाचा आल्हाद आणि बदलते रूप

सामाजिक जीवनातील खदखद व वास्तव

आध्यात्मिक उंची आणि अंधश्रद्धेवर प्रहार

स्त्रीचे रूप, व्यथा आणि सामर्थ्य

भ्रष्टाचार, राजकारण, शेतकरी व समाजातील समस्या

भावनांची विविधता – कोमल भावस्पर्शी कविता, तितक्याच प्रभावी सामाजिक आणि विचारप्रवर्तक कविता.

अद्वितीय शब्दफेक आणि लयबद्धता – प्रत्येक कवितेतून उमलणारा नवा भावार्थ.

‘भाग्यरेषा’ : जीवनाचे सार शब्दबद्ध करणारा काव्यसंग्रह”

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Weight 0.2 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।

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