Dhanyachi Kulkatha

75.00

In the human circulization agriculture development and progressive evolution of grains is an important developmental step. Grains, such as paddy, corn, wheat, cereal millet has been discribed in this book with is origin and development till today by Dr. K.K. Kshirsagar interestingly.

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Description

Description

In the human circulization agriculture development and progressive evolution of grains is an important developmental step. Grains, such as paddy, corn, wheat, cereal millet has been discribed in this book with is origin and development till today by Dr. K.K. Kshirsagar interestingly.

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Weight 75 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Jagatik Varsa Sthalancha Itihas

200.00

“जागतिक वारसा सà¥à¤¥à¤³à¤¾à¤‚चा इतिहास महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ विशेष संदरà¥à¤­à¤¾à¤¸à¤¹â€ या पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ात केवळ माहिती ची जंतà¥à¤°à¥€ नाही, तर यात सामाजिक इतिहासाचà¥à¤¯à¤¾ अनà¥à¤·à¤‚गाने, परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ भूगोलाचा विचार करून, सामानà¥à¤¯ मधà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤—ीयाचà¥à¤¯à¤¾ खिशाचà¥à¤¯à¤¾ अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ दृषà¥à¤Ÿà¥€à¤¨à¥‡ व परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ करणाऱà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ मानसिकतेचा- मानसशासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤šà¤¾ वेध घेणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ करणारे हे 100-125 पानांचे छोटेखानी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• आहे. या सामाजिकशासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤‚चा विचार करताना जागतिक वारसा का ? कसा ? कशा रितीने ? जपला पाहिजे. या पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¤¾à¤‚चा उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤‚चा मागोवा घेणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ या पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ात केलेला आहे.
….पà¥à¤°à¤¾.विजयकà¥à¤®à¤¾à¤° विनायक भवारी

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अकà¥à¤·à¤¯ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¾ पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤•र राजूरकर मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से आषà¥à¤Ÿà¥€, जिला वरà¥à¤§à¤¾ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾, ओजसà¥à¤µà¥€ और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संगà¥à¤°à¤¹ उनके पà¥à¤°à¤–र राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विचारों, सामाजिक सरोकारों और à¤à¤• संघरà¥à¤·à¤°à¤¤ यà¥à¤µà¤¾ के अंतरà¥à¤®à¤¨ का सजीव दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¤¼ है।

अकà¥à¤·à¤¯ की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशपà¥à¤°à¥‡à¤®’ की गहरी छाप है। वे छतà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शिवाजी महाराज, लोकमानà¥à¤¯ तिलक, चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ नायकों से अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राजà¥à¤¯’ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ देखते हैं।
इतिहास और संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚- जैसे पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° (मणिपà¥à¤°) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, आतंकवाद, जी-20 समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माधà¥à¤¯à¤® से बेबाक और तीखा पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° करते हैं।
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ और कड़े तेवरों के अलावा, अकà¥à¤·à¤¯ के कावà¥à¤¯ में à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤°à¥€, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़à¥à¤¬à¤¾ उनकी कविताओं को आम यà¥à¤µà¤¾à¤“ं से जोड़ता है।
संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में, अकà¥à¤·à¤¯ राजूरकर à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ कवि हैं जिनकी आवाज़ में यà¥à¤µà¤¾à¤“ं का शंखनाद, मातृभूमि के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अटूट समरà¥à¤ªà¤£ और ‘भारत को भवà¥à¤¯’ बनाने का दृढ़ संकलà¥à¤ª गूà¤à¤œà¤¤à¤¾ है।
पूरà¥à¤µ में अभाविप जैसे संगठन में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ से कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपà¥à¤° राजà¥à¤¯ के अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤—म कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· काम का अनà¥à¤­à¤µ किया है। इनका जनजाति और सेवा कारà¥à¤¯ से विशेष लगाव है।