Description

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मागील ३५ वर्षांपासून रविशंकर झिंगरे प्रायोगिक रंगभूमीसाठी सातत्याने लेखन करीत आहेत. कविता, चित्रपट कथा, पटकथा, संवाद आणि गीते या प्रवासात त्यांची लेखणी रमली, ती नाट्य लेखनात. मानवी मनाचा शोध घेण्यासाठी किंवा बदलत्या सामाजिक जाणीवांचा वेध घेण्यासाठी, नाटक या माध्यमाचा प्रभावी उपयोग ते करतात.
रविशंकर झिंगरे
गीतांजली या रवींद्रनाथ टागोर यांच्या नोबेल पारितोषिक प्राप्त कवितांचा हा भावानुवाद, त्यांच्या अंतर्मनातील प्रवाहांचा साक्षीदार आहे. मूळ कवितांमधील गेयता, परमेशाच्या भेटीची तळमळ आणि समर्पणाची भावना या अनुवादातून प्रकट होतेच, पण त्यासोबतच रवींद्रनाथांच्या शब्दातील सौंदर्य देखील प्रतिबिंबित होत रहातं.
रविशंकर झिंगरे परभणीच्या श्री शिवाजी महाविद्यालयातून इलेक्ट्रॉनिक्स विभागाचे प्रमुख म्हणून सेवानिवृत्त झाले आहेत.

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Weight 0.300 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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Marathi Dnyanpeeth Vijete

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The Gyanpeeth prize in literature in Marathi has been awarded to three saraswatas, namely shri. V.S. Khandekar, Shri. V.D. Karandikar and Kusumagraja, Shri. V. V. Shirwadkar. The life and their lifestyle can be made known through this book, the only one available in Marathi.

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Gadge Baba was not an organizer of propagator of the religion or a saint. He was social worker who moved in the society and taught people about social uplift and the methods to be observed for it. He taught the people the fundamental and basic links of life and worked as an angel. He was moving educational institute, who worked alone, and made people to follow him for the cause of society. The book tells about the experiments made him and the odds faced by him. The information in the book would benefit social workers in particular.

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पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।