Additional information
| Weight | 25 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 25 kg |
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| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
प्रा. डॉ. राहुल एम. भोरे, संगीत विभाग प्रमुख तथा सहयोगी प्राध्यापक, श्रीमती रेवाबेन मनोहरभाई पटेल महिला कला महाविद्यालय, भंडारा.
मो.नं. ९८५०४८७३१९
इ.मेल.: srujan.bhore3@gmail.com
१. संत गाडगेबाबा अमरावती विद्यापीठ अमरावती येथून २००६ साली संगीत विषयात स्नातकोत्तर पदवी विशेष प्राविण्यासह प्राप्त
२. श्रीमती रेवाबेन मनोहरभाई पटेल महिला कला महाविद्यालय येथे २००९ पासून संगीत विभाग प्रमुख कार्यरत.
३. राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपूर विद्यापीठ नागपूर येथून ‘गझलनवाज भीमराव पांचाळे यांचे शास्त्रीय उपशास्त्रीय संगीतातील योगदानः एक योगकार्य’ या विषयावर डॉ. शुभदा मांडवगडे यांच्या मार्गदर्शनाखाली आचार्य पदवी प्राप्त.
४. राष्ट्रीय व आंतरराष्ट्रीय स्तरावरील नियतकालिकांमध्ये आजवर एकूण ५० शोध निबंध प्रकाशित.
५. शास्त्रीय आणि उपशास्त्रीय संगीताच्या सादरीकरण करिता महाराष्ट्र शासनाच्या सांस्कृतिक व क्रीडा मंत्रालयामार्फत विशेष पुरस्कार
६. ‘इन्सा’ इंडियन नेट-सेट असोसिएशन अमरावती तर्फे विद्याभुषण पुरस्कार.
७. अकरावे अखिल भारतीय आंबेडकरी साहित्य संमेलन भंडारा तर्फे विशेष सन्मान.
८. गझलसागर सागर प्रतिष्ठान मुंबई सम्यक विचार मंच नागपूरच्या वतीने गझल गायकीच्या संशोधनाच्या कार्याकरीता विशेष सन्मान.
९. गझलसागर प्रतिष्ठान मुंबई व मैफल प्रतिष्ठान लाखनीच्यावतीने गझल गायकीच्या संशोधनाच्या कार्यकरिता कविवर्य सुरेश भट गझल गौरव पुरस्कार विशेष सन्मान
१०. राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपूर विद्यापीठ संगीत अभ्यास मंडळाचे सदस्य म्हणून कार्यरत.
११. संत तुकडोजी महाराज नागपूर विद्यापीठ संगीत विषयाच्या आचार्य पदवीचे मार्गदर्शक.
१२. मराठी गजलेचा सारथी गझल नवाज भीमराव पांचाळे, पोथी प्रकाशन तर्फे ई-बुक प्रकाशित.
१३. स्वरांकित गझल, पोथी प्रकाशन तर्फे ई-बुक प्रकाशित.
The service law, which is difficult to understand, is made easy through this book in Marathi. The related people such as lawyers, debt and taxpaying people and the students of C. A. are benefited through the book. The high court judgement, the result of tribunal can be selected by taxpayers and act according to these rules easily.
This book is written mainly from the old points of views and thinking, linking them to the modern atmosphere. The heartful attachment with deep emotional appeal to the modern mind for thought full public adjustment, without selfish, wild mottoes guiding them. The racial and caste based barriers causing harmful actions needs this type of balanced guidelines, which the book provides successfully.
अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।
अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।
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