Mahila Vaidnyanik

125.00

The contribution of the women in the field of science is available in this book in Marathi for the first time. There are 31 women scientists inall whose life and endeavour in the scientific field is discussed by Shri. Prakash Manikpure.

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The contribution of the women in the field of science is available in this book in Marathi for the first time. There are 31 women scientists inall whose life and endeavour in the scientific field is discussed by Shri. Prakash Manikpure.

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Weight 150 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Kamtha

250.00

नाव : रामदास सांडू पाडळे

सेवानिवृत्त ग्रामसेवक
हे माझे पहिलेच पुस्तक.. रानोमाळ फिरून बिबीच्या झाडावरील गोटे बिबे तोडून आणायचे. कामठ्यावर बसून गोटे फोडून त्यातील गोडांबी काढायची. व संसाराचा गाडा हाकायचा. असा परंपरागत व्यवसाय असलेल्या अजिंठा डोंगरकुशीतील आदिवासी कोळी समाजाच्या स्त्री-पुरुषांच्या जीवनातील सुख-दुःखे, मान-अपमान, जीवन संघर्ष, त्यांचे मनोविश्व टिपण्याचा प्रयत्न केला आहे. यात कितपत यश आले, हे वाचकांनी ठरवायचे आहे.

Manakshar

249.00

पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।

Gitanjali

200.00

मागील ३५ वर्षांपासून रविशंकर झिंगरे प्रायोगिक रंगभूमीसाठी सातत्याने लेखन करीत आहेत. कविता, चित्रपट कथा, पटकथा, संवाद आणि गीते या प्रवासात त्यांची लेखणी रमली, ती नाट्य लेखनात. मानवी मनाचा शोध घेण्यासाठी किंवा बदलत्या सामाजिक जाणीवांचा वेध घेण्यासाठी, नाटक या माध्यमाचा प्रभावी उपयोग ते करतात. रविशंकर झिंगरे गीतांजली या रवींद्रनाथ टागोर यांच्या नोबेल पारितोषिक प्राप्त कवितांचा हा […]

Sahakar Kaydyatil Nave Badal

200.00

The changes in the co-operative laws according to the 97 amendment in the constitutions of India with simplifications of laws is available in this book.

Sahakari Vittiy Sanstha Nivadnuk Margadarshak

350.00

Board of directors constitutes member of different disciplines such as intellectuals, serial thinkers etc. All are supposed to work for carrying the institution and making progress in it, so that it can work for a long period. The institutions established should remain during the life time of the established and after them also, it should survive in order to fix the method for the election of these directors, what is to be done to make it powerful and responsible, the guideline are available in this book.