Additional information
| Weight | 150 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 150 kg |
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| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
शिकà¥à¤·à¤£à¤¾à¤šà¥€ वाटचाल हे पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ व पालकांसाठी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¥€ आहे. सौ. अरà¥à¤šà¤¨à¤¾ घोरमाडे या जिलà¥à¤¹à¤¾ परिषद शाळेत शिकà¥à¤·à¤¿à¤•ा असून तà¥à¤¯à¤¾à¤‚चे पती शà¥à¤°à¥€ सà¥à¤°à¥‡à¤‚दà¥à¤° घोरमाडे सेवानिवृतà¥à¤¤ शिकà¥à¤·à¤• आहेत. तà¥à¤¯à¤¾à¤‚चे मूळ गाव नागपूर (गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£) तहसील येथील चिचोली (फेटरी) आहे. गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ à¤à¤¾à¤—ातील अनेक विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥à¤¯à¤¾à¤‚साठी तà¥à¤¯à¤¾à¤‚नी शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• कारà¥à¤¯ केले. गरीब कà¥à¤Ÿà¥à¤‚बात जनà¥à¤®à¤²à¥‡à¤²à¥à¤¯à¤¾ पती-पतà¥à¤¨à¥€à¤¨à¥‡ अनेक संकटांना तोंड देऊन यशसà¥à¤µà¥€à¤ªà¤£à¥‡ रिषठव कà¥à¤·à¤¿à¤¤à¤¿à¤œ या दोन मà¥à¤²à¤¾à¤‚चे संगोपन केले. अतà¥à¤¯à¤‚त कठीण पà¥à¤°à¤¸à¤‚गात देखील शिकà¥à¤·à¤£à¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¤¾à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¯ देत विविध अनà¥à¤à¤µà¤¾à¤‚दà¥à¤µà¤¾à¤°à¥‡ नीती मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚चे संसà¥à¤•ार करून तà¥à¤¯à¤¾à¤‚ना सà¥à¤œà¤¾à¤£ नागरिक केले. सौ.अरà¥à¤šà¤¨à¤¾ यांचà¥à¤¯à¤¾ धाडसाची आणि कषà¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¥€ ही कथा मातृतà¥à¤µà¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ आणि पालकतà¥à¤µà¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¾ तसेच नैतिक मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ अधोरेखित करते. पवितà¥à¤° विचारांनी सà¥à¤‚दर à¤à¤¾à¤²à¥‡à¤²à¥à¤¯à¤¾ या पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ास लेखिका सौ. अरà¥à¤šà¤¨à¤¾ सà¥à¤°à¥‡à¤‚दà¥à¤° घोरमाडे यांनी शबà¥à¤¦à¤¬à¤¦à¥à¤§ केले आहे.
This book is focused for the use in financial institutions particularly policy, fund, deposit, loan, collection, investment, works, accounting, assembly or meeting, customer, marketing, danger, branch, time and others 20 items management is discussed in this book. A sort of check-list can be got through it. The highest medium and lower management skills are included.
सत शà¥à¤°à¥€ अकाल, दास अजीत सिंह à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ सिख धरà¥à¤® के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों और गà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤£à¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ रखते हैं। आपने सिख इतिहास, गà¥à¤°à¥à¤“ं के जीवन तथा गà¥à¤°à¤®à¤¤ विचारधारा का गहन अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया है।
इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से लेखक का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी तथा जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥ पाठकों तक सिख गà¥à¤°à¥à¤“ं की शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं को सरल और सहज à¤à¤¾à¤·à¤¾ में पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¤¾ है, ताकि वे गà¥à¤°à¥ परंपरा के आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• और सामाजिक संदेश को समठसकें।
लेखक ने इससे पूरà¥à¤µ गà¥à¤°à¥ अमरदास जी (तीसरे नानक जी) के जीवन पर आधारित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• लिखी है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ सिख गà¥à¤°à¥ और मराठा संतों की सामाजिक à¤à¥‚मिका पर आधारित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• “दो धाराà¤à¤ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ाश” à¤à¥€ लिखी है।
लेखन और अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ के साथ-साथ लेखक धरà¥à¤®-पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° तथा समाज जागरण के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से संलगà¥à¤¨ हैं।
वाहेगà¥à¤°à¥ जी का खालसा।
वाहेगà¥à¤°à¥ जी की फतेह ।।
अकà¥à¤·à¤¯ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤•र राजूरकर मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से आषà¥à¤Ÿà¥€, जिला वरà¥à¤§à¤¾ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾, ओजसà¥à¤µà¥€ और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संगà¥à¤°à¤¹ उनके पà¥à¤°à¤–र राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विचारों, सामाजिक सरोकारों और à¤à¤• संघरà¥à¤·à¤°à¤¤ यà¥à¤µà¤¾ के अंतरà¥à¤®à¤¨ का सजीव दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¤¼ है।
अकà¥à¤·à¤¯ की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशपà¥à¤°à¥‡à¤®’ की गहरी छाप है। वे छतà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शिवाजी महाराज, लोकमानà¥à¤¯ तिलक, चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ नायकों से अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं और अखंड à¤à¤¾à¤°à¤¤ तथा ‘राम राजà¥à¤¯’ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ देखते हैं।
इतिहास और संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚- जैसे पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° (मणिपà¥à¤°) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, आतंकवाद, जी-20 समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ राजनीति – पर à¤à¥€ अपनी लेखनी के माधà¥à¤¯à¤® से बेबाक और तीखा पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° करते हैं।
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ और कड़े तेवरों के अलावा, अकà¥à¤·à¤¯ के कावà¥à¤¯ में à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ मन की कोमलता à¤à¥€ बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤°à¥€, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़à¥à¤¬à¤¾ उनकी कविताओं को आम यà¥à¤µà¤¾à¤“ं से जोड़ता है।
संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में, अकà¥à¤·à¤¯ राजूरकर à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ कवि हैं जिनकी आवाज़ में यà¥à¤µà¤¾à¤“ं का शंखनाद, मातृà¤à¥‚मि के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अटूट समरà¥à¤ªà¤£ और ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ को à¤à¤µà¥à¤¯’ बनाने का दृढ़ संकलà¥à¤ª गूà¤à¤œà¤¤à¤¾ है।
पूरà¥à¤µ में अà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤ª जैसे संगठन में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ से कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपà¥à¤° राजà¥à¤¯ के अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤—म कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· काम का अनà¥à¤à¤µ किया है। इनका जनजाति और सेवा कारà¥à¤¯ से विशेष लगाव है।
Mokshagundum Visheshwarayya who was rewarded Bharat Ratna is subject the book. His whole life contribution is assessed in this centenary book. The book is a source of insperation to all children, grownups and the old. There was no book avialable on such a great man in Marathi. This need in fulfilled by Shri. Vijay Yangalwar. Each architect, engineer and every citizen should read this book.
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