Additional information
| Weight | 30 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 30 kg |
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| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
The holy pilgrim place Pandharpur is a seat of valuable centre of religions faith in Maharashtra. This book is useful of the guideline before visiting God Vitthal at Pandharpur.
This is a small book about yogic posters/yogasanas which is useful for each and everyone to follow daily, through handy book, you can perform the as there are pictures and modes of the asamas shown.
“‘भाग्यरेषा’ काव्यसंग्रहाची खास वैशिष्ट्ये
निसर्गाचा आल्हाद आणि बदलते रूप
सामाजिक जीवनातील खदखद व वास्तव
आध्यात्मिक उंची आणि अंधश्रद्धेवर प्रहार
स्त्रीचे रूप, व्यथा आणि सामर्थ्य
भ्रष्टाचार, राजकारण, शेतकरी व समाजातील समस्या
भावनांची विविधता – कोमल भावस्पर्शी कविता, तितक्याच प्रभावी सामाजिक आणि विचारप्रवर्तक कविता.
अद्वितीय शब्दफेक आणि लयबद्धता – प्रत्येक कवितेतून उमलणारा नवा भावार्थ.
‘भाग्यरेषा’ : जीवनाचे सार शब्दबद्ध करणारा काव्यसंग्रह”
In this book all factors about book publication is maid avialable to the reader. How many books on which particular subjects are published in Marathis in the year 2008 can be understood by reading the book. The book is for the book sellers particularly and has made a successful effort to lesson the regional inbalance in Marathi publishers and to propogate Social marketing in this field. The reader can get newly published books immidiately at demand. So please read this book.
अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।
अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।
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