Additional information
| Weight | 30 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 30 kg |
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| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
Machines have become part and parcel of the human life today. With the help of machines our daily life has become easy, yet very few of us know the science behind them working of the machines. The writer has explained it in easy language. The machines and the scientific working behind explain the mystry of the their functions. This interesting book by Shri. Jayant Arende is valuable for all of us.
A Journey from Frontier to Frontier: Across the Soul of India From the Eastern Dawn to the Western Horizon and from Kashmir’s icy heights to Kanyakumari’s oceanic edge, this book is a breathtaking chronicle of one man’s self-driven odyssey across India’s vast and varied frontiers. Through vivid reflections and sharp-eyed observations, the author captures the […]
In this book all the eighteen Puranas have been describes as to become available to the new generation. It includes the historical information side by side.
प्रा. सुरेश खेडकर
हास्यबोध म्हणजे नागपूरच्या दैनिक देशोन्नती मध्ये विसेक वर्षांपूर्वी रविवार पुरवणीत प्रकाशित झालेल्या याच नावाच्या लेख मालिकेत माझे मित्र प्रा. सुरेश खेडकर यांनी वर्षभर सातत्याने लिहिलेल्या लेखांचा संग्रह. त्यावेळी मी देशोन्नतीचा पुरवणी संपादक होतो. आचार्य प्र. के. अत्रे यांच्या झेंडूची फुले, या विडंबन कवितासंग्रहाची परंपरा सक्षमतेने सांभाळणारा प्रा. सुरेश खेडकर यांचा एप्रिल फुले, हा विडंबन कवितांचा संग्रह १९८३ मध्ये प्रकाशित झाला होता. त्याची प्रस्तावना सुध्दा मीच लिहिली होती.
त्याचाच धागा धरून मी कवी मित्र सुरेश खेडकर यांनी एखादे विनोदी सदर देशोन्नतीसाठी लिहावे, असा आग्रह धरला. वाचकांना हास्यांकित करून त्यांचे मनोरंजन करणारा विनोदी किस्से व त्यातूनच सध्याच्या आधुनिक परिस्थितीत “शहाणे करूनी सोडावे सकल जन” याप्रमाणे सहजतेने शहाणपणाचा डोस देणारा बोध यांचा संगम घडविणाऱ्या हास्यबोध या मालिकेचा जन्म झाला. हास्यबोधची लोकप्रियता दिवसेंदिवस वाढत गेली. अल्पशिक्षित उच्चशिक्षित, विद्यार्थी, शिक्षक, वार्ताहर, पोलीस कॉन्स्टेबल, वकील, व्यापारी, ऑटोचालक इत्यादी विविध व्यवसायातील वाचकांचा उदंड प्रतिसाद या सदाला त्यावेळी मिळाला. तसाच चांगला प्रतिसाद या पुस्तकालाही मिळेल, याची मला खात्री आहे. शाळा कॉलेजातील विद्यार्थी व विभिन्न स्तरांचे कर्मचारी यांच्या ट्रेनिंग प्रोग्राम मध्ये हास्यबोध नक्कीच उपयुक्त ठरेल.
प्रा. सुरेश खेडकर यांचे विषयांतर हे आणखी एक पुस्तक हास्यबोध सह प्रकाशित होत आहे. त्याबद्दलही त्यांचे हार्दिक अभिनंदन.
पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।
The year 2013 was an international year for statistics. The Contribution of the Indian statistics and it usage is made is made publically known in this book. The is major statistics proficient are presented in it with their international contribution by the writer.
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