Description
In this book all the eighteen Puranas have been describes as to become available to the new generation. It includes the historical information side by side.
In this book all the eighteen Puranas have been describes as to become available to the new generation. It includes the historical information side by side.
| Weight | 50 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
“विचारांचा कॅनवà¥à¤¹à¤¾à¤¸â€ हे पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• मà¥à¤¹à¤£à¤œà¥‡ डॉ. नीता देशपांडे यांचा अनà¥à¤à¤µ, आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन आणि जीवनदृषà¥à¤Ÿà¥€ यांचा सà¥à¤°à¥‡à¤– संगम आहे. या लेखसंगà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤¤à¥€à¤² पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• लेख, हा केवळ शबà¥à¤¦à¤¾à¤‚चा संच नाही, तर विचारांचा à¤à¤• सखोल पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ आहे — जिथे वाचकाला सà¥à¤µà¤¤à¤ƒà¤šà¤¾ आरसा दिसतो.
शिकत असताना आणि शिकवताना आलेले अनà¥à¤à¤µ, विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥à¤¯à¤¾à¤‚शी संवाद साधताना उमजलेली मनोवृतà¥à¤¤à¥€, समाजातील बदलती मूलà¥à¤¯à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ आणि लहानपणाचà¥à¤¯à¤¾ आठवणींमधून साकारलेले विचार, हे सारे या पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ाचà¥à¤¯à¤¾ पानोपानी जिवंत à¤à¤¾à¤¸à¤¤à¥‡. लेखिकेची à¤à¤¾à¤·à¤¾ ही सहज, सोपी आणि तरीही हृदयाला à¤à¤¿à¤¡à¤£à¤¾à¤°à¥€ आहे. हे पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• वाचकाला अंतरà¥à¤®à¥à¤– करणारे, विचारांना चालना देणारे आणि जीवनाकडे पाहणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोन अधिक वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• करणारे ठरेल, अशी खातà¥à¤°à¥€ आहे.
Mokshagundum Visheshwarayya who was rewarded Bharat Ratna is subject the book. His whole life contribution is assessed in this centenary book. The book is a source of insperation to all children, grownups and the old. There was no book avialable on such a great man in Marathi. This need in fulfilled by Shri. Vijay Yangalwar. Each architect, engineer and every citizen should read this book.
अकà¥à¤·à¤¯ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤•र राजूरकर मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से आषà¥à¤Ÿà¥€, जिला वरà¥à¤§à¤¾ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾, ओजसà¥à¤µà¥€ और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संगà¥à¤°à¤¹ उनके पà¥à¤°à¤–र राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विचारों, सामाजिक सरोकारों और à¤à¤• संघरà¥à¤·à¤°à¤¤ यà¥à¤µà¤¾ के अंतरà¥à¤®à¤¨ का सजीव दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¤¼ है।
अकà¥à¤·à¤¯ की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशपà¥à¤°à¥‡à¤®’ की गहरी छाप है। वे छतà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शिवाजी महाराज, लोकमानà¥à¤¯ तिलक, चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ नायकों से अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं और अखंड à¤à¤¾à¤°à¤¤ तथा ‘राम राजà¥à¤¯’ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ देखते हैं।
इतिहास और संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚- जैसे पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° (मणिपà¥à¤°) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, आतंकवाद, जी-20 समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ राजनीति – पर à¤à¥€ अपनी लेखनी के माधà¥à¤¯à¤® से बेबाक और तीखा पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° करते हैं।
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ और कड़े तेवरों के अलावा, अकà¥à¤·à¤¯ के कावà¥à¤¯ में à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ मन की कोमलता à¤à¥€ बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤°à¥€, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़à¥à¤¬à¤¾ उनकी कविताओं को आम यà¥à¤µà¤¾à¤“ं से जोड़ता है।
संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में, अकà¥à¤·à¤¯ राजूरकर à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ कवि हैं जिनकी आवाज़ में यà¥à¤µà¤¾à¤“ं का शंखनाद, मातृà¤à¥‚मि के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अटूट समरà¥à¤ªà¤£ और ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ को à¤à¤µà¥à¤¯’ बनाने का दृढ़ संकलà¥à¤ª गूà¤à¤œà¤¤à¤¾ है।
पूरà¥à¤µ में अà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤ª जैसे संगठन में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ से कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपà¥à¤° राजà¥à¤¯ के अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤—म कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· काम का अनà¥à¤à¤µ किया है। इनका जनजाति और सेवा कारà¥à¤¯ से विशेष लगाव है।
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