Additional information
| Weight | 0.250 kg |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 16 × 3 cm |
| Weight | 0.250 kg |
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| Dimensions | 24 × 16 × 3 cm |
शिक्षणाची वाटचाल हे पुस्तक विद्यार्थी व पालकांसाठी प्रेरणादायी आहे. सौ. अर्चना घोरमाडे या जिल्हा परिषद शाळेत शिक्षिका असून त्यांचे पती श्री सुरेंद्र घोरमाडे सेवानिवृत्त शिक्षक आहेत. त्यांचे मूळ गाव नागपूर (ग्रामीण) तहसील येथील चिचोली (फेटरी) आहे. ग्रामीण भागातील अनेक विद्यार्थ्यांसाठी त्यांनी शैक्षणिक कार्य केले. गरीब कुटुंबात जन्मलेल्या पती-पत्नीने अनेक संकटांना तोंड देऊन यशस्वीपणे रिषभ व क्षितिज या दोन मुलांचे संगोपन केले. अत्यंत कठीण प्रसंगात देखील शिक्षणास प्राधान्य देत विविध अनुभवांद्वारे नीती मूल्यांचे संस्कार करून त्यांना सुजाण नागरिक केले. सौ.अर्चना यांच्या धाडसाची आणि कष्टाची ही कथा मातृत्वाच्या आणि पालकत्वाच्या कर्तव्याला तसेच नैतिक मूल्यांच्या अस्तित्वाला अधोरेखित करते. पवित्र विचारांनी सुंदर झालेल्या या पुस्तकास लेखिका सौ. अर्चना सुरेंद्र घोरमाडे यांनी शब्दबद्ध केले आहे.
The essence of Vedanta conceived in the Upanishadas are the expressions of the purest and heighted thoughts of the ancient rishis. Through them the cosmic viewpoint of the thinkers is revealed. The hidden meaning of them has been expressed in simple words of flowing language in Marathi by shri B. R. Modak. One of them is Aarunyopanishad.
This book in Hindi is about Maharshi Kanik who was India’s grate political advisor. Political, commercial, industrial management guideline from Indian point a view are found in it, while studying about for thinking one can know precious vision of Indians simultaneously.
पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।
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