Shabdanch jagan

150.00

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प्रा. सुरेश माधवराव नारायणे मुळ विंचूरचे पण आता नांदगाव जि. नाशिक येथील हे संवेदनशील आणि जीवनाभिमुख लेखन करणारे कवी आहेत. बालपणापासूनच आलेल्या संघर्षांनी त्यांच्या व्यक्तिमत्त्वाला आकार दिला आणि त्या अनुभवांचं प्रतिबिंब त्यांच्या लेखणीत स्पष्टपणे दिसून येतं. त्यांचे मनोमनी ललित लेख संग्रह आणि काव्य झुला काव्यसंग्रह वाचकांच्या साठी एक साहित्यिक शिदोरी ठरली आहे. आता हे तिसरे “शब्दांचं जगणं” या त्यांच्या कवितांमध्ये, भक्तिपर, प्रेम, विरह, सामाजिक जाणीवा आणि वास्तव जीवनातील संघर्ष यांचा प्रभावी संगम आढळतो. साधी, ओघवती आणि मनाला भिडणारी भाषा ही त्यांच्या लेखनाची खासियत आहे.
कवी संमेलनांतून सादरीकरण करताना ते श्रोत्यांच्या मनात थेट घर करतात. “शब्दांचं जगणं” या काव्यसंग्रहातून त्यांनी आपल्या जीवनातील अनुभवांना आणि भावविश्वाला प्रभावी शब्दरूप दिलं आहे. त्यांच्या या काव्यसंग्रहाचे स्वागत… या पुढे त्यांच्या हातुन अधिक समाजाभिमुख कविता लिहिली जावी या साठी शुभेच्छा !!

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Weight 0.250 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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Devarshi Narad

80.00

One among the for mentality follower or souls (manipulation) of lord Brahmdeo and one among the eight immortal souls in Indian mythology, Narad was a variable personality well read in many shastras (disciplines), but her himself had considered high esteemed for the devotion towards God (Bhakti) and all the time remained a devotee. This one is the very first book written in Marathi on Narad Maharshi.

Sevakar Vaishishtye Aani Parichay

210.00

The service law, which is difficult to understand, is made easy through this book in Marathi. The related people such as lawyers, debt and taxpaying people and the students of C. A. are benefited through the book. The high court judgement, the result of tribunal can be selected by taxpayers and act according to these rules easily.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।

Dr. Babasaheb Ambedkar Yanchi Manav Sutre

50.00

The thoughts of Dr. Ambedkar about the values like freedom, self-respect, education, religion of the country, Buddha?s religion, untouchbility. Caste-system, struggle, organization and democracy etc. are worthy and enables each generation for the social uplift and self-honour.