Bhartiya Dhyan Parampara

300.00

“भारतीय ज्ञान परंपरा: एक दृष्टिक्षेप” हे पुस्तक भारतभूमीच्या अखंड आणि समृद्ध बौद्धिक वारशाचा परिचय करून देणारे आहे. भारताचा इतिहास हा केवळ साम्राज्यांचे उदय-अस्त आणि युद्धांचे जय-पराजय यापुरता मर्यादित नसून, तो ज्ञान, तत्त्वज्ञान, विज्ञान, कला आणि संस्कृतीचा अखंड प्रवाह आहे. या ग्रंथातून वाचकाला वेद, उपनिषदे, पुराणकथा, प्राचीन तत्त्वज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, रसायनशास्त्र, धातुविज्ञान, कला, वास्तुकला तसेच तक्षशिला-नालंदा यांसारख्या विद्यापीठांची ओळख होईल.

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“भारतीय ज्ञान परंपरा: एक दृष्टिक्षेप” हे पुस्तक भारतभूमीच्या अखंड आणि समृद्ध बौद्धिक वारशाचा परिचय करून देणारे आहे. भारताचा इतिहास हा केवळ साम्राज्यांचे उदय-अस्त आणि युद्धांचे जय-पराजय यापुरता मर्यादित नसून, तो ज्ञान, तत्त्वज्ञान, विज्ञान, कला आणि संस्कृतीचा अखंड प्रवाह आहे. या ग्रंथातून वाचकाला वेद, उपनिषदे, पुराणकथा, प्राचीन तत्त्वज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, रसायनशास्त्र, धातुविज्ञान, कला, वास्तुकला तसेच तक्षशिला-नालंदा यांसारख्या विद्यापीठांची ओळख होईल.

हे पुस्तक समग्र अभ्यासाचा दावा करत नाही, परंतु वाचकाला या अथांग परंपरेत प्रवेश करण्यासाठी एक सोपा मार्ग दाखवते. विद्यार्थी, संशोधक आणि भारतीय संस्कृतीबद्दल कुतूहल असलेल्या वाचकांसाठी हे पुस्तक एक प्रवेशिका ठरेल. या ग्रंथाचा उद्देश आपल्या गौरवशाली ज्ञानपरंपरेची ओळख करून देणे आणि वाचकांना अधिक सखोल अभ्यासासाठी प्रेरित करणे हा आहे.

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Weight 0.250 kg
Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
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