Additional information
| Weight | 200 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 200 kg |
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| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
Our children are surrounded by many types of dangers. We aught to make them aware about visible and invisible zones of danger the only book of this type available in Marathi
This book is about the all time best hockey player Major Dhyanchand, Whose skillful play had amazed Hitlar. Hitler had offered Dhyanchand the post of general in his army. The book salutes the glorious majestic personality of the Indian hockey player Dhyanchand, who is honored all over the world had rejected the post for the Dr. Sanjay Khalatkar sake of India’s pride.
अकà¥à¤·à¤¯ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤•र राजूरकर मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से आषà¥à¤Ÿà¥€, जिला वरà¥à¤§à¤¾ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾, ओजसà¥à¤µà¥€ और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संगà¥à¤°à¤¹ उनके पà¥à¤°à¤–र राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विचारों, सामाजिक सरोकारों और à¤à¤• संघरà¥à¤·à¤°à¤¤ यà¥à¤µà¤¾ के अंतरà¥à¤®à¤¨ का सजीव दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¤¼ है।
अकà¥à¤·à¤¯ की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशपà¥à¤°à¥‡à¤®’ की गहरी छाप है। वे छतà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शिवाजी महाराज, लोकमानà¥à¤¯ तिलक, चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ नायकों से अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं और अखंड à¤à¤¾à¤°à¤¤ तथा ‘राम राजà¥à¤¯’ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ देखते हैं।
इतिहास और संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚- जैसे पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° (मणिपà¥à¤°) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, आतंकवाद, जी-20 समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ राजनीति – पर à¤à¥€ अपनी लेखनी के माधà¥à¤¯à¤® से बेबाक और तीखा पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° करते हैं।
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ और कड़े तेवरों के अलावा, अकà¥à¤·à¤¯ के कावà¥à¤¯ में à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ मन की कोमलता à¤à¥€ बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤°à¥€, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़à¥à¤¬à¤¾ उनकी कविताओं को आम यà¥à¤µà¤¾à¤“ं से जोड़ता है।
संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में, अकà¥à¤·à¤¯ राजूरकर à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ कवि हैं जिनकी आवाज़ में यà¥à¤µà¤¾à¤“ं का शंखनाद, मातृà¤à¥‚मि के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अटूट समरà¥à¤ªà¤£ और ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ को à¤à¤µà¥à¤¯’ बनाने का दृढ़ संकलà¥à¤ª गूà¤à¤œà¤¤à¤¾ है।
पूरà¥à¤µ में अà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤ª जैसे संगठन में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ से कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपà¥à¤° राजà¥à¤¯ के अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤—म कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· काम का अनà¥à¤à¤µ किया है। इनका जनजाति और सेवा कारà¥à¤¯ से विशेष लगाव है।
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