Vaidarbhiya Granthasampada 06

200.00

In order to get full information about the publication Business in Vidarbha, this book is very much useful. Colleges, Librarian, Book-sellers, Writers, Orators, prize given, Kirtankar, Printers, News Paper Sellers, New Publishers, each and every person and aspect in this field of books and publishing can be got through this book.

5 in stock

Compare
SKU: Vaidarbhiya Granthasampada 06 Category:
Description

Description

In order to get full information about the publication Business in Vidarbha, this book is very much useful. Colleges, Librarian, Book-sellers, Writers, Orators, prize given, Kirtankar, Printers, News Paper Sellers, New Publishers, each and every person and aspect in this field of books and publishing can be got through this book.

Additional information

Additional information

Weight 300 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
More Products

Hitopdesh Chaturya Sutre

50.00

The elders dont read the book and remain unadvised by ignoring the ill this book. The book though is suppossed to be read by children, it is very very important for people of all age groups. The original sanskrit epigrams and their meaning, inner meaning is revealed in simple language in the book.

Bhagyaresha

150.00

“‘भाग्यरेषा’ काव्यसंग्रहाची खास वैशिष्ट्ये

निसर्गाचा आल्हाद आणि बदलते रूप

सामाजिक जीवनातील खदखद व वास्तव

आध्यात्मिक उंची आणि अंधश्रद्धेवर प्रहार

स्त्रीचे रूप, व्यथा आणि सामर्थ्य

भ्रष्टाचार, राजकारण, शेतकरी व समाजातील समस्या

भावनांची विविधता – कोमल भावस्पर्शी कविता, तितक्याच प्रभावी सामाजिक आणि विचारप्रवर्तक कविता.

अद्वितीय शब्दफेक आणि लयबद्धता – प्रत्येक कवितेतून उमलणारा नवा भावार्थ.

‘भाग्यरेषा’ : जीवनाचे सार शब्दबद्ध करणारा काव्यसंग्रह”

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।

Jagatik Varsa Sthalancha Itihas

200.00

“जागतिक वारसा स्थळांचा इतिहास महाराष्ट्राच्या विशेष संदर्भासह” या पुस्तकात केवळ माहिती ची जंत्री नाही, तर यात सामाजिक इतिहासाच्या अनुषंगाने, पर्यटन भूगोलाचा विचार करून, सामान्य मध्यवर्गीयाच्या खिशाच्या अर्थशास्त्राच्या दृष्टीने व पर्यटन करणाऱ्याच्या मानसिकतेचा- मानसशास्त्राचा वेध घेण्याचा प्रयत्न करणारे हे 100-125 पानांचे छोटेखानी पुस्तक आहे. या सामाजिकशास्त्रांचा विचार करताना जागतिक वारसा का ? कसा ? कशा रितीने ? जपला पाहिजे. या प्रश्नांचा उत्तरांचा मागोवा घेण्याचा प्रामाणिक प्रयत्न या पुस्तकात केलेला आहे.
….प्रा.विजयकुमार विनायक भवारी

Panth Pradarshak Sant

70.00

This is the 2nd book in the series on saints, In it we can get acquainted with the gents like Guru Nanak, Kabir, Gorakhanath, Basweshwar, Chakradhan with thin proper contribution to the society. The modern generation needs to know about them