Gayatripanishad

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Weight 20 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Jag Jahiratiche

175.00

There is a focus on the requirements of the fine art students and the small advertisers in this book. Most of the people are unaware about the science of advertisement and therefore cannot gain full return through advertisement. In fact a product can be successfully advertised through the smallest advertisement with proper knowledge of it. Those who wish to work in the field of advertisement but have not takes formal education will be benefited by reading this book and others would be enlightened.

Yashodhara

200.00

डॉ. विद्याधर देवदास बन्सोड यांचे कथा काव्य नाटक ‘यशोधरा’ कथेतून हळूहळू एक वेगळी, खोल आणि अस्वस्थ करणारी वाट उघडत जाते. हे नाटक इतिहासाला स्त्रीच्या नजरेतून नव्याने बघायला भाग पाडते. या नाट्यात यशोधरा केवळ त्यागाची, मौनाची किंवा सहनशीलतेची सावली म्हणून उभी राहात नाही, तर ती विचार करते. प्रश्न विचारते.
डॉ. विद्याधर बन्सोड
हे नाटक वाचताना सतत जाणवत राहते की त्यांची शैली काहीतरी वेगळे सुचवते. कथेकरीच्या माध्यमातून उलगडत जाणारे हे नाट्य शब्दांच्या पलीकडे जाऊन वाचकाच्या मनाला आणि मेंदूला अंतर्मुख करते. यशोधरा हे पारंपरिक अर्थाने ऐतिहासिक नाटक नाही; तसेच ते केवळ स्त्रीवादी घोषणा करणारे लेखनही नाही.
कथाकाव्याच्या या अनोख्या शैलीतून असे नाट्य लिहिणे आणि सादर करणे अत्यंत आव्हानात्मक आहे. ‘यशोधरा’ साठी त्यांनी केलेले सखोल संशोधन, विविध दृष्टिकोनांतून केलेले चिंतन, मनन आणि वैचारिक प्रगल्भता यांचा हा परिपाक आहे. जे वाचकांना केवळ एक अनुभवच देत नाही, तर एक नवी व्यापक वैचारिक दृष्टी देते.

Yashasathi Kalpakta

150.00

To get success novelty is an essential factor. It is through this novelty and innovation for it that has made on daily life interesting. The search and techniques about it and acts on different dimensional factors are discussed in this book. This type of book is made available is Marathi for the first time.

Vaidarbhiya Granthasampada 06

200.00

In order to get full information about the publication Business in Vidarbha, this book is very much useful. Colleges, Librarian, Book-sellers, Writers, Orators, prize given, Kirtankar, Printers, News Paper Sellers, New Publishers, each and every person and aspect in this field of books and publishing can be got through this book.

Manakshar

249.00

पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।