Description
This is one act play of Dr. Vadyalkar based on social sequence, the dialogues is which are very interesting.
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| Weight | 50 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
सत श्री अकाल, दास अजीत सिंह भल्ला सिख धर्म के सिद्धांतों और गुरुबाणी के प्रति गहरा विश्वास रखते हैं। आपने सिख इतिहास, गुरुओं के जीवन तथा गुरमत विचारधारा का गहन अध्ययन किया है।
इस पुस्तक के माध्यम से लेखक का उद्देश्य युवा पीढ़ी तथा जिज्ञासु पाठकों तक सिख गुरुओं की शिक्षाओं को सरल और सहज भाषा में पहुँचाना है, ताकि वे गुरु परंपरा के आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश को समझ सकें।
लेखक ने इससे पूर्व गुरु अमरदास जी (तीसरे नानक जी) के जीवन पर आधारित पुस्तक लिखी है। इसके अतिरिक्त सिख गुरु और मराठा संतों की सामाजिक भूमिका पर आधारित पुस्तक “दो धाराएँ एक प्रकाश” भी लिखी है।
लेखन और अध्यापन के साथ-साथ लेखक धर्म-प्रचार तथा समाज जागरण के कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।
वाहेगुरु जी का खालसा।
वाहेगुरु जी की फतेह ।।
अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।
अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।
विषयांतर, हे पुस्तक म्हणजे नागपूरच्या दैनिक तरुण भारत मध्ये ३०-३२ वर्षांपूर्वी दीर्घकाळ प्रकाशित झालेल्या विषयांतर, या सदरातील प्रा. सुरेश खेडकर यांच्या २७ लेखांचा संग्रह. मूळ जुन्या लेखातील विचार अधिक स्पष्ट करण्यासाठी प्रत्येक लेखाच्या शेवटी त्यांनी, त्यातील विषयांशी सुसंगत ताजा कलम नव्याने लिहून जोडला आहे. यातील बहुसंख्य लेखात त्यांनी आपले अनुभव हलक्या फुलक्या विनोदी शैलीत मांडलेले आहेत. प्रा. सुरेश खेडकर एक उत्तम विडंबन कवी सुद्धा आहेत. १९८३ साली प्रकाशित झालेल्या त्यांच्या एप्रिल फुले या विडंबन काव्य संग्रहात पद्य स्वरूपात व्यक्त झालेली त्यांची शैली, गद्य स्वरूपात विषयांतर मध्ये दिसून येते.
आहे. विषयांतर सोबतच त्यांचे आणखी एक पुस्तक हास्यबोधही प्रकाशित होत
ते मुळात विद्युत अभियांत्रिकी (Electrical Engineering) चे प्राध्यापक असले तरी त्यांचे मराठी साहित्यातील योगदान प्रशंसनीय आहे. प्रा. सुरेश खेडकर यांच्याजवळ अनुभवांचा आणखी पुष्कळ साठा आहे व तो सुद्धा त्यांच्या आगामी पुस्तकांच्या रूपात लवकरात लवकर यावा, अशी शुभेच्छा मी व्यक्त करतो.
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Many events in the nature are mysterous and cannot be understood easily by common man. The events, happenings and wonders in the nature have scientific reasens behind them. These scientific reasons are explained in this book with the help of appropriate pictures, in common man’s language by Dr. Madhukar Apte.
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