Description

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“मराठीतून जर्मन – शिकणं आता सौपं”

“भाषा ही फक्त संवादाचं साधन नाही ती नव्या संस्कृतीकडे आणि नव्या संधींकडे नेणारं दार आहे.”

आज अत्यंत आनंद आणि अभिमान वाटतो की “जर्मन भाषा गुरु” हे पुस्तक अधिकृतपणे प्रकाशित होत आहे. हे पुस्तक खास मराठी विद्यार्थ्यांसाठी तयार केलेले आहे, जे जर्मन भाषा शिकू इच्छितात पण इंग्रजी माध्यमामुळे अडचण अनुभवतात. आता मराठी माध्यमातूनही तुम्ही सहजपणे आणि आत्मविश्वासाने जर्मन शिकू शकता “मराठी माध्यमातून सोपं जर्मन शिका !”

या पुस्तकात तुम्हाला मिळेलः

जर्मन अक्षरमाला आणि योग्य उच्चार शिकण्यासाठी सोपी उदाहरणे

मराठी भाषेतून स्पष्ट केलेले व्याकरण आणि नियम

会 दैनंदिन संभाषणासाठी वापरता येणारी वाक्यरचना

शब्दसंग्रह वाढवण्यासाठी उपयुक्त यादी आणि सराव तक्ते

जर्मन संस्कृती, शिक्षण पद्धती आणि रोजगाराच्या संधींचं मार्गदर्शन

हे पुस्तक कोणासाठी आहे?

परदेशात शिक्षण किंवा नोकरीचं स्वप्न पाहणारे मराठी विद्यार्थी

नवशिके जर्मन शिकणारे आणि भाषा शिकण्यात रस असलेले वाचक

तांत्रिक आणि व्यावसायिक क्षेत्रात जर्मनची गरज असलेले युवक

आणि सर्वजण जे “मराठी विचारसरणीतून परदेशी भाषा आत्मसात” करू इच्छिता

जर्मन शिका आपल्या भाषेतून

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Dimensions 24 × 16 × 3 cm
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Nivdak Banking Nivade

350.00

The selected cases relating to banks is made available to bank related people and eg. Societies, Banks, Auditors, C.A. Pleader etc., in Marathi and to laymen/common people in this book people can get aware and enlightened through related work accordingly in them and can perform their banking and other financial, commercial field carefully and cautionary. The important case and their results have been mentioned.

Akhand Bharat ke Swar

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अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।

Khajgi Mahavidyalayanche Vyavasthapan V Prashasan

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सत श्री अकाल, दास अजीत सिंह भल्ला सिख धर्म के सिद्धांतों और गुरुबाणी के प्रति गहरा विश्वास रखते हैं। आपने सिख इतिहास, गुरुओं के जीवन तथा गुरमत विचारधारा का गहन अध्ययन किया है।
इस पुस्तक के माध्यम से लेखक का उद्देश्य युवा पीढ़ी तथा जिज्ञासु पाठकों तक सिख गुरुओं की शिक्षाओं को सरल और सहज भाषा में पहुँचाना है, ताकि वे गुरु परंपरा के आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश को समझ सकें।
लेखक ने इससे पूर्व गुरु अमरदास जी (तीसरे नानक जी) के जीवन पर आधारित पुस्तक लिखी है। इसके अतिरिक्त सिख गुरु और मराठा संतों की सामाजिक भूमिका पर आधारित पुस्तक “दो धाराएँ एक प्रकाश” भी लिखी है।
लेखन और अध्यापन के साथ-साथ लेखक धर्म-प्रचार तथा समाज जागरण के कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।
वाहेगुरु जी का खालसा।
वाहेगुरु जी की फतेह ।।