Kaivalyopanishad

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Weight 25 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Eka Bhuvaidnyanikachi Bhraman Gatha

200.00

श्री राजीव हिंगवे श्री राजीव हिंगवे, हे सिव्हिल इंजिनियर असून ते गेली 40 वर्षे बांधकाम व्यावसायिक (Builder) म्हणून नागपूर, पुणे येथे प्रख्यात आहेत. मराठी वाचनाच्या आवडीमुळे 2022 मध्ये त्यांनी मराठीत M.A केले व सध्या PhD ची तयारी अंतिम टप्यावर आली आहे. श्री राजीव हिंगवे मागील चाळीस वर्षांपासून आ. बाबासाहेबांशी एक भक्त म्हणून जुळले आहेत व […]

Panth Pradarshak Sant

70.00

This is the 2nd book in the series on saints, In it we can get acquainted with the gents like Guru Nanak, Kabir, Gorakhanath, Basweshwar, Chakradhan with thin proper contribution to the society. The modern generation needs to know about them

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।

Bhartiya Nobel Vijete

125.00

Noble Prize is the most prestigious honour in the world. The Indian who have won this prize. So far has been accounted in this book with their premising work for the benefit of the mankind.