Maharshi Bhrugu

60.00

MaharshiBhrugu is a symbol of the highest genious of human intellect. He was profecient in many fields of knowledge. His was the fundamental research work in many ancient scientific branches. The full-phased description about the life and astonishing work can be read in this book by Shri. Vijay Yangalwar.

5 in stock

Compare
SKU: Maharshi Bhrugu Categories: , ,
Description

Description

MaharshiBhrugu is a symbol of the highest genious of human intellect. He was profecient in many fields of knowledge. His was the fundamental research work in many ancient scientific branches. The full-phased description about the life and astonishing work can be read in this book by Shri. Vijay Yangalwar.

Additional information

Additional information

Weight 50 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
More Products

Bhartatil Sahakar Chalval : Tatve v Vyavhar

120.00

Indian co-operative movement, its principles and working on which a book is written to benefit the students of B.com Part I students of Pune university. The book is also useful for the students of yashwantrao Chavan University and also can be used by G.D.C.A. students. The workers in co-operative fields and movements also can be help from this book.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।

अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।

Vyavasay Vyavasthapan

250.00

This book is focused for the use in financial institutions particularly policy, fund, deposit, loan, collection, investment, works, accounting, assembly or meeting, customer, marketing, danger, branch, time and others 20 items management is discussed in this book. A sort of check-list can be got through it. The highest medium and lower management skills are included.

Hasyabodh

200.00

प्रा. सुरेश खेडकर
हास्यबोध म्हणजे नागपूरच्या दैनिक देशोन्नती मध्ये विसेक वर्षांपूर्वी रविवार पुरवणीत प्रकाशित झालेल्या याच नावाच्या लेख मालिकेत माझे मित्र प्रा. सुरेश खेडकर यांनी वर्षभर सातत्याने लिहिलेल्या लेखांचा संग्रह. त्यावेळी मी देशोन्नतीचा पुरवणी संपादक होतो. आचार्य प्र. के. अत्रे यांच्या झेंडूची फुले, या विडंबन कवितासंग्रहाची परंपरा सक्षमतेने सांभाळणारा प्रा. सुरेश खेडकर यांचा एप्रिल फुले, हा विडंबन कवितांचा संग्रह १९८३ मध्ये प्रकाशित झाला होता. त्याची प्रस्तावना सुध्दा मीच लिहिली होती.
त्याचाच धागा धरून मी कवी मित्र सुरेश खेडकर यांनी एखादे विनोदी सदर देशोन्नतीसाठी लिहावे, असा आग्रह धरला. वाचकांना हास्यांकित करून त्यांचे मनोरंजन करणारा विनोदी किस्से व त्यातूनच सध्याच्या आधुनिक परिस्थितीत “शहाणे करूनी सोडावे सकल जन” याप्रमाणे सहजतेने शहाणपणाचा डोस देणारा बोध यांचा संगम घडविणाऱ्या हास्यबोध या मालिकेचा जन्म झाला. हास्यबोधची लोकप्रियता दिवसेंदिवस वाढत गेली. अल्पशिक्षित उच्चशिक्षित, विद्यार्थी, शिक्षक, वार्ताहर, पोलीस कॉन्स्टेबल, वकील, व्यापारी, ऑटोचालक इत्यादी विविध व्यवसायातील वाचकांचा उदंड प्रतिसाद या सदाला त्यावेळी मिळाला. तसाच चांगला प्रतिसाद या पुस्तकालाही मिळेल, याची मला खात्री आहे. शाळा कॉलेजातील विद्यार्थी व विभिन्न स्तरांचे कर्मचारी यांच्या ट्रेनिंग प्रोग्राम मध्ये हास्यबोध नक्कीच उपयुक्त ठरेल.
प्रा. सुरेश खेडकर यांचे विषयांतर हे आणखी एक पुस्तक हास्यबोध सह प्रकाशित होत आहे. त्याबद्दलही त्यांचे हार्दिक अभिनंदन.

Nobel Jagajjete

330.00

The nobel prize is the highest one offered to the laureates in the field of literature, science, philosophy etc. The book gives information about the beginning of the prize, and also about these who have won it. The book is one such document in Marathi that everyone must read. Writer Prakash Manikpure