Sarvopanishad

20.00

Out of stock

Compare
SKU: Sarvopanishad Categories: ,
Additional information

Additional information

Weight 30 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
More Products

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अकà¥à¤·à¤¯ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¾ पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤•र राजूरकर मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से आषà¥à¤Ÿà¥€, जिला वरà¥à¤§à¤¾ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾, ओजसà¥à¤µà¥€ और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संगà¥à¤°à¤¹ उनके पà¥à¤°à¤–र राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विचारों, सामाजिक सरोकारों और à¤à¤• संघरà¥à¤·à¤°à¤¤ यà¥à¤µà¤¾ के अंतरà¥à¤®à¤¨ का सजीव दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¤¼ है।

अकà¥à¤·à¤¯ की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशपà¥à¤°à¥‡à¤®’ की गहरी छाप है। वे छतà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शिवाजी महाराज, लोकमानà¥à¤¯ तिलक, चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ नायकों से अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राजà¥à¤¯’ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ देखते हैं।
इतिहास और संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚- जैसे पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° (मणिपà¥à¤°) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, आतंकवाद, जी-20 समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माधà¥à¤¯à¤® से बेबाक और तीखा पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° करते हैं।
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ और कड़े तेवरों के अलावा, अकà¥à¤·à¤¯ के कावà¥à¤¯ में à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤°à¥€, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़à¥à¤¬à¤¾ उनकी कविताओं को आम यà¥à¤µà¤¾à¤“ं से जोड़ता है।
संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में, अकà¥à¤·à¤¯ राजूरकर à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ कवि हैं जिनकी आवाज़ में यà¥à¤µà¤¾à¤“ं का शंखनाद, मातृभूमि के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अटूट समरà¥à¤ªà¤£ और ‘भारत को भवà¥à¤¯’ बनाने का दृढ़ संकलà¥à¤ª गूà¤à¤œà¤¤à¤¾ है।
पूरà¥à¤µ में अभाविप जैसे संगठन में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ से कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपà¥à¤° राजà¥à¤¯ के अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤—म कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· काम का अनà¥à¤­à¤µ किया है। इनका जनजाति और सेवा कारà¥à¤¯ से विशेष लगाव है।

Jagtik Tapman Vadh

80.00

With the disastrous features of the modern lifestyle, how the temperature of our planet is increasing day by day is discussed in this book. The reasons behind this rise and the problems and risks and dangers that burst out of it are hinted by the writer in simple laymans language. Writer G.B. Sardesai