Additional information
| Weight | 20 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
| Weight | 20 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 cm |
The audit examination and management of meetings are the subjects on which full information can be gained through this boom. It is particularly useful for financial co-operative institutions.
The first police officer (I.P.S.) Kiran Bedi. Who lived a glorified life of an officer. How did the develop her personality, what difficulties she had to face and confront during her life journey from Kiran Bedi to Didi Bedi as a Police Officer and then as a political personality in the 2nd innings of her life is presented interesting through this book. The new generation can get guidence through it.
In the human circulization agriculture development and progressive evolution of grains is an important developmental step. Grains, such as paddy, corn, wheat, cereal millet has been discribed in this book with is origin and development till today by Dr. K.K. Kshirsagar interestingly.
Everyone of us cames into contact with the shops often for this or that purpose, yet we are unaware about its working. We come accron some small shops and also we visit big and departmental stores. The question these shopkeepers have to face are discussed here in this book. Retail shops, smallest hand cart shop. (Theta) handelled by the owners are guided in different catagories such as place of the shop, the goods which are sold, price fixing, profit etc. This is the first book on this subject in Marathi, by a wellknown writer Shri. Dilip Godbole.
शब्दांच्या दुनियेतील एक ऋषितुल्य व्यक्तिमत्व…
नागपूरच्या मातीतील एक प्रगल्भ कवी, संवेदनशील लेखक आणि जनसंपर्क क्षेत्रातील एक अनुभवी नाव म्हणजे अमोल दिलीपराव तपासे. राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपूर विद्यापीठातून ‘जनसंवाद’ विषयात पदव्युत्तर पदवी संपादन केलेल्या अमोलजींच्या लेखणीत समाजाचा आरसा आणि मातीचा सुगंध दोन्ही आढळतात. स्फूर्तीगीते, ओतप्रोत देशभक्तीपर रचना, भावविभोर भावगीते, भक्तीमय भजने आणि वैविध्यपूर्ण काव्यसंग्रह असा त्यांचा प्रदीर्घ साहित्यिक प्रवास आहे. त्यांचे वैचारिक लेख आणि कविता महाराष्ट्रातील नामांकित वृत्तपत्रांतून व सोशल मीडियावरून सातत्याने वाचकांच्या भेटीला येत असतात, ज्यातून समाजमनाचा वेध घेतला जातो. अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाच्या मानाच्या व्यासपीठावर काव्य सादरीकरण करण्याचा बहुमान त्यांना प्राप्त झाला आहे, ही त्यांच्या काव्यप्रतिभेची मोठी पावती आहे. त्यांचा ‘श्रीमहन्मंगले’ हा काव्यसंग्रह म्हणजे राष्ट्रचिंतन आणि भक्तीरसाचा एक अजोड संगम आहे. त्यांच्या प्रगल्भ वैचारिक मांडणीचा आणि उत्कट शब्दकलेचा हा संग्रह एक जिवंत पुरावाच आहे. सध्या त्यांची काही नवीन पुस्तके प्रकाशनाच्या वाटेवर असून रसिक वाचकांसाठी ती पर्वणीच ठरेल.
अक्षय पुष्पा प्रभाकर राजूरकर मुख्य रूप से आष्टी, जिला वर्धा (महाराष्ट्र) से जुड़े एक युवा, ओजस्वी और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संग्रह उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक सरोकारों और एक संघर्षरत युवा के अंतर्मन का सजीव दस्तावेज़ है।
अक्षय की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशप्रेम’ की गहरी छाप है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नायकों से अत्यंत प्रभावित हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राज्य’ की पुनर्स्थापना का स्वप्न देखते हैं।
इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मुद्दों- जैसे पूर्वोत्तर (मणिपुर) की स्थिति, आतंकवाद, जी-20 सम्मेलन और वर्तमान राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से बेबाक और तीखा प्रहार करते हैं।
राष्ट्रवाद और कड़े तेवरों के अलावा, अक्षय के काव्य में एक युवा मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोस्तों की दुनियादारी, रिश्तों का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़्बा उनकी कविताओं को आम युवाओं से जोड़ता है।
संक्षेप में, अक्षय राजूरकर एक ऐसे कवि हैं जिनकी आवाज़ में युवाओं का शंखनाद, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और ‘भारत को भव्य’ बनाने का दृढ़ संकल्प गूँजता है।
पूर्व में अभाविप जैसे संगठन में सक्रियता से कार्यरत रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपुर राज्य के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रत्यक्ष काम का अनुभव किया है। इनका जनजाति और सेवा कार्य से विशेष लगाव है।
Select at least 2 products
to compare