Tejbindupanishad

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Weight 20 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Siddhstotramani -Vyadhinashak ani Chaitanyadayi Stotra Sangrah

₹550.00

डॉ. इंद्रायणी केदार जोशी
बी.ए.एम.एस., एम.डी. (आयु.) स्वस्थवृत्त एवं योग, डी.वाय.एन.डी. (योग, निसर्गोपचार एवं आहार विशेषज्ञ)
समग्र आरोग्य व जीवनशैली मार्गदर्शक विशेषज्ञ
आयुर्वेद व योग शास्त्रात अध्यापन, संशोधन व आरोग्य जनजागृती क्षेत्रात सक्रिय योगदान
इवा कॉलेज ऑफ आयुर्वेद येथे स्वस्थवृत्त एवं योग विभागात सहाय्यक प्राध्यापिका म्हणून कार्यरत
भारतीय शास्त्रीय संगीतावर आधारित संगीतोपचार तज्ञ (Clinical Music Therapist)
“कैवल्यनाद वेलनेस फाउंडेशन” (Music Therapy Education & Research Centre) संस्थापिका
“कैवल्यनाद म्युझिक अकॅडमी” संस्थापिका
कैवल्यनाद वेलनेस फाउंडेशन च्या म्युझिक थेरपी प्रमाणपत्र अभ्यासक्रमांच्या संचालिका व प्रशिक्षक
योग, मर्म थेरपी व गर्भसंस्कार विशेषज्ञ व प्रशिक्षक
आयुर्वेद, संगीतोपचार व समग्र आरोग्य विषयांवरील लेखिका व संशोधक
अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडळ, मिरज येथून “संगीत विशारद” आणि “संगीत अलंकार” (गायन) पदवी प्राप्त
महाराष्ट्र सुगम संगीत समिती, मुंबई- पुणे येथून “संगीत रत्न” (सुगम संगीत) पदवी प्राप्त
प्रकाशित पुस्तकेः
अनुभवांच्या आठवणी – मराठी काव्यसंग्रह (२०१५)
हृदयाची भावफुले मराठी काव्यसंग्रह (२०२०)

Tav Tejacha Ek Ansh De

₹200.00

छत्रपती शिवाजी महाराजांचे कार्य म्हणजे केवळ इतिहासातील पराक्रम नव्हे, तर राष्ट्रनिर्मितीचा जाज्वल्य आदर्श आहे.
शेतात चांगले पीक यावे यासाठी काही बियाणे मातीखाली गाडावी लागतात; त्याचप्रमाणे महाराजांनी आणि त्यांच्या संपूर्ण घराण्याने महाराष्ट्रासाठी अतुलनीय त्याग केला. हा त्याग आपण कधीही विसरता कामा नये. आज त्यांच्या नावाचा केवळ जयघोष करून थांबणे पुरेसे नाही; त्यांनी राष्ट्रनिर्मितीसाठी जे कार्य केले, ते पुढे नेणे हीच आपली खरी जबाबदारी आहे. त्यामुळे त्यांना फक्त डोक्यावर घेण्यापेक्षा, डोक्यात घेण्याची वेळ आता आली आहे.
त्यांचा पराक्रम अतुलनीय होता, पण आपण स्वतःला त्यांचे वारसदार म्हणवून घेत असताना, आपण समाजासाठी काय कार्य करतो, हे पाहणे तितकेच आवश्यक आहे..
आपण महाराज होऊ शकत नाही; पण त्यांच्या कर्तृत्वातील गुणांचा अंगीकार करून त्यांचे खरे वारसदार होण्याचा प्रयत्न नक्कीच करू शकतो.
जयघोषापेक्षा आचरणात शिवराय जिवंत ठेवणे, हीच खरी शिवभक्ती.

Adhunik Kalatil Santanchi Mandiyali

₹120.00

This is the 3rd book in the series birth on the lives of the saints. The saints having enfluence on the people since last 150 years have been includes in this book. The saints like Gajanan Maharaj, Gondawalekar Maharaj, Gulabrao Maharaj and other ten saints lives and prominent in their life have been described in this book. The book can encourage the new generation.

Manakshar

₹249.00

पल्लवी लघाटे का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे कल्याण (महाराष्ट्र) में निवासरत हैं। उन्होंने भूगोल विषय में एम.ए. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे एक कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा एवं लेखन के क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बबीना स्थित सेंट्रल स्कूल में पी. जी. शिक्षक के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त कल्याण (महाराष्ट्र) के गुरुकुल विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तथा एक कोचिंग संस्थान के एडमिन विभाग में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे लेखन एवं कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा kuchnaya.com के फेसबुक पेज के लिए ब्लॉग लेखन का कार्य भी कर चुकी हैं।
लेखन के प्रति उनका रुझान बचपन से ही रहा है। मन की संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों की गहराईयों तथा समाज और प्रकृति से जुड़े विविध पहलुओं को वे अपनी रचनाओं में सहजता और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी विशेष रुचि है। वे सुगम संगीत में विशारद की शिक्षा पूर्णता की ओर अग्रसर हैं तथा गायन परीक्षाओं में विशेष योग्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
उनकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। उनकी कविताएँ ‘बालमन की उड़ान’ काव्य-संग्रह तथा मराठी पुस्तक ‘फुलोरा’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर लेखन हेतु उन्हें अनेक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें चेतना मंच फेसबुक पेज द्वारा ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया है।
‘मनाक्षर’ उनकी प्रथम स्वतंत्र काव्य-कृति है। इस संग्रह में जीवन, प्रेम, रिश्ते, संघर्ष, आशा, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के विविध रंगों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। उनका विश्वास है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन से मन तक पहुँचने वाला एक सशक्त सेतु हैं।