Gramgeeta Aani Gram Rakshan

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Weight 25 kg
Dimensions 21.5 × 14 cm
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Aadi Shankaracharya

90.00

The fundamentalist of Sanatau Vedic religion (Hindu religion), establisher of advaitya tradition in India, the learned Guru Aadi Shankarachary is known to all of us. His full life, and achievements are described fully in this book of Nachiket Publication

Nivdak Banking Nivade

350.00

The selected cases relating to banks is made available to bank related people and eg. Societies, Banks, Auditors, C.A. Pleader etc., in Marathi and to laymen/common people in this book people can get aware and enlightened through related work accordingly in them and can perform their banking and other financial, commercial field carefully and cautionary. The important case and their results have been mentioned.

Akhand Bharat ke Swar

200.00

अकà¥à¤·à¤¯ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¾ पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤•र राजूरकर मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से आषà¥à¤Ÿà¥€, जिला वरà¥à¤§à¤¾ (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾, ओजसà¥à¤µà¥€ और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनकी कविताओं का संगà¥à¤°à¤¹ उनके पà¥à¤°à¤–र राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विचारों, सामाजिक सरोकारों और à¤à¤• संघरà¥à¤·à¤°à¤¤ यà¥à¤µà¤¾ के अंतरà¥à¤®à¤¨ का सजीव दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¤¼ है।

अकà¥à¤·à¤¯ की लेखनी में ‘वीर रस’ और ‘देशपà¥à¤°à¥‡à¤®’ की गहरी छाप है। वे छतà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शिवाजी महाराज, लोकमानà¥à¤¯ तिलक, चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र आज़ाद और वीर सावरकर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ नायकों से अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं और अखंड भारत तथा ‘राम राजà¥à¤¯’ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ देखते हैं।
इतिहास और संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गौरव के साथ-साथ, कवि समसामयिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚- जैसे पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° (मणिपà¥à¤°) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, आतंकवाद, जी-20 समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ राजनीति – पर भी अपनी लेखनी के माधà¥à¤¯à¤® से बेबाक और तीखा पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° करते हैं।
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ और कड़े तेवरों के अलावा, अकà¥à¤·à¤¯ के कावà¥à¤¯ में à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ मन की कोमलता भी बसती है। जीवन की कशमकश, करियर की चिंता, दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤°à¥€, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का टूटना और अकेलेपन से लड़कर मंज़िल पाने का जज़à¥à¤¬à¤¾ उनकी कविताओं को आम यà¥à¤µà¤¾à¤“ं से जोड़ता है।
संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में, अकà¥à¤·à¤¯ राजूरकर à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ कवि हैं जिनकी आवाज़ में यà¥à¤µà¤¾à¤“ं का शंखनाद, मातृभूमि के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अटूट समरà¥à¤ªà¤£ और ‘भारत को भवà¥à¤¯’ बनाने का दृढ़ संकलà¥à¤ª गूà¤à¤œà¤¤à¤¾ है।
पूरà¥à¤µ में अभाविप जैसे संगठन में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ से कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रहे हैं। गढ़चिरोली और मणिपà¥à¤° राजà¥à¤¯ के अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤—म कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· काम का अनà¥à¤­à¤µ किया है। इनका जनजाति और सेवा कारà¥à¤¯ से विशेष लगाव है।

Ardas

165.00

सत शà¥à¤°à¥€ अकाल, दास अजीत सिंह भलà¥à¤²à¤¾ सिख धरà¥à¤® के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों और गà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤£à¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ रखते हैं। आपने सिख इतिहास, गà¥à¤°à¥à¤“ं के जीवन तथा गà¥à¤°à¤®à¤¤ विचारधारा का गहन अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया है।
इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से लेखक का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी तथा जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥ पाठकों तक सिख गà¥à¤°à¥à¤“ं की शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं को सरल और सहज भाषा में पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¤¾ है, ताकि वे गà¥à¤°à¥ परंपरा के आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• और सामाजिक संदेश को समठसकें।
लेखक ने इससे पूरà¥à¤µ गà¥à¤°à¥ अमरदास जी (तीसरे नानक जी) के जीवन पर आधारित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• लिखी है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ सिख गà¥à¤°à¥ और मराठा संतों की सामाजिक भूमिका पर आधारित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• “दो धाराà¤à¤ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ाश” भी लिखी है।
लेखन और अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ के साथ-साथ लेखक धरà¥à¤®-पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° तथा समाज जागरण के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से संलगà¥à¤¨ हैं।
वाहेगà¥à¤°à¥ जी का खालसा।
वाहेगà¥à¤°à¥ जी की फतेह ।।